Wednesday, 12 February 2020

खस घास

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खस घास
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बुखार हो तो इसकी जड़ का काढ़ा पीयें . उसमें गिलोय और तुलसी मिला लें तो और भी अच्छा रहेगा . हल्का बुखार हो या रह रह कर बुखार आये , बुखार टूट न रहा हो तो यह काढ़ा बहुत लाभदायक रहता है .
पित्त , एसिडिटी या घबराहट हो तो इसकी जड़ कूटकर काढ़ा बनाएं और मिश्री मिलाकर पीयें . चर्म रोग या एक्जीमा या एलर्जी हो तो इसकी 3-4 ग्राम जड़ में 2-3 ग्राम नीम मिलाकर काढ़ा बनाएं और सवेरे शाम पीयें .
दिल संबंधी कोई परेशानी हो तो इसकी जड़ में मुनक्का मिलाकर काढ़ा बनाकर मसलकर छानकर पीयें .इससे होरमोंस भी ठीक रहेंगे और धड़कन की गति भी ठीक रहेगी . किडनी की परेशानी में खस और गिलोय का काढ़ा सवेरे सवेरे पीयें . हाय बी. पी . हो या एंजाइना की समस्या हो तो इसकी जड़ और अर्जुन की छाल का काढ़ा पीयें .
प्यास बहुत अधिक लगती हो तो इसकी जड़ कूटकर पानी में ड़ाल दें . बाद में छानकर पानी पी लें . यह शीतल अवश्य है ; परन्तु इसे लेने से जोड़ों का दर्द बढ़ता नहीं है .
खस का इस्‍तेमाल सिर्फ ठंडक के लिए ही नहीं होता, आयुर्वेद जैसी परंपरागत चिकित्‍सा प्रणालियों में औषधि के रूप में भी इसका इस्‍तेमाल होता है। इसके अलावा इससे तेल बनता है और इत्र जैसी खुशबूदार चीजों में भी इसका उपयोग होता है।


खस या खसखस ( Khus) एक सुगंधित पौधा है। इसका वानस्पतिक नाम वेटिवीरिआ जिजेनिऑयडीज (Vetiveria) है जिसकी व्युत्पत्ति तमिल के शब्द वेटिवर से हुई प्रतीत होती है। यह सुगंधित, पतले एकवर्ध्यक्ष (Racemes) का लंबे पुष्पगुच्छवाला वर्षानुवर्षी पौधा है। इसकी अनुशूकी का जोड़ा सीकुररहित होता है, जिसमें से एक अवृंत और पूर्ण तथा दूसरा वृंतयुक्त और पृंपुष्पी होता है। अवृंत अनुशूकि में बारीक कंटक होते हैं। इसका प्रकंद (rhizoma) बहुत सुगंधित होता है। प्रकंद का उपयोग भारत में इत्र बनाने और ओषधि के रूप में प्राचीन काल से हो रहा है। पौधे की जड़ों का उपयोग विशेष प्रकार का पर्दा बनाने में होता है जिसे ‘खस की टट्टी’ कहते हैं। इसको ग्रीष्म ऋतु में कमरे तथा खिड़कियों पर लगाते हैं और पानी से तर रखते हैं जिससे कमरे में ठंडी तथा सुगंधित वायु आती है और कमरा ठंडा बना रहता है। प्रकंद के वाष्प आसवन से सुगंधित वाष्पशील तेल प्राप्त होता है जिसका उपयोग इत्र बनाने में होता है। फूलों की गंध को पकड़ रखने की इसमें क्षमता पर्याप्त होती है। https://indianjadibooti.com/Jadistore/Khus-Root
यह सघन गुच्छेदार घास राजस्थान एवं भारत के अन्य राज्यों में स्वजात उगती पाई जाती है। राजस्थान में भरतपुर तथा अजमेर जिलों में यह खूब उगती है। इस पादप के मजबूत डंठल प्रकद से निकले हुए लगभग 2 मीटर तक ऊंचे, सघन गुच्छों में, मजबूत स्पंजी जड़ों वाले होते हैं। इसकी जड़ों से प्राप्त तेल इत्र उद्योग में प्रसाधन सामग्री बनाने व साबुन का सुगंध प्रदान करने में प्रयुक्त होता है। खस तेल का अध्याम, शूल व दुराग्राही उल्टियों में वातानुलोमक के रूप में प्रयोग होता है। यह उद्दीपक, स्वेदनकारी व शीतलक माना जाता है। इसके अतिरिक्त आमवात, कटिवेदना व मोच में भी इससे मालिश करने पर आराम मिलता है। https://hi.wikipedia.org/…/%E0%A4%96%E0%A4%B8%E0%A4%96%E0%A…
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खस एक सुगन्धित घास होती है. खस को अंग्रेजी में Vetiver कहा जाता है, जोकि खस का तमिल शब्द है. गुच्छों में उगने वाले इस पौधे की ऊंचाई 5-6 फीट तक हो सकती है. इसके पौधे देखने में सरकंडे या सरपत के पौधे जैसे लगते हैं.
खस की जड़ों (Khus roots) से निकले तेल का प्रयोग परफ्यूम, इत्र और सुगन्धित तेल, शर्बत, दवाइयाँ, साबुन और सौन्दर्य प्रसाधन आदि बनाने में किया जाता है. खस के इत्र का अरब व अन्य देशों में निर्यात भी किया जाता है.
– खस का पौधा पानी वाली जगह जैसे झील, तालाब, नदी आदि के किनारे अपने आप उग आता है. उत्तर भारत के राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार व दक्षिण भारत में केरल, कर्नाटक आदि राज्यों में खस की खेती की जाती है.
– खस (Vetiver) का प्रयोग गर्मियों में चलने वाले कूलर फैन में महकने वाली घास के रूप में किया जाता है. लकड़ी की छीलन के बीच में इसे लगाने से कूलर से बढ़िया भीनी भीनी तरावट वाली खुशबू आती है.
– खस की ऊपरी घास काटकर नीचे की घास से खस के पर्दे बनाये जाते हैं, जिसे खस की टट्टी कहा जाता था. पहले लोग गर्मियों में घर की खिडकियों में खस के पर्दे लगाकर उन्हें पानी से भिगोये रखते थे, जिससे गर्मियों की लू भी ठंडी, महकदार हवा में बदल जाती थी. https://indianjadibooti.com/Jadistore/Khus-Root
खस के फायदे – VETIVER BENEFITS IN HINDI :
– ठंडी तासीर की वजह से खस का प्रयोग गर्मियों में खस का शरबत बनाने में किया जाता है. यह शर्बत पीने से प्यास बुझती है, शरीर की जलन मिटती है, दिमाग और शरीर में तरावट आती है व गर्मियों के त्वचा रोग भी नष्ट होते हैं.
– इसके अलावा खस (Vetiver) का प्रयोग ह्रदय रोग, उलटी, त्वचा रोग, बुखार, धातुदोष, सिरदर्द, रक्त विकार, पेशाब की जलन, सांस के रोग, पित्त रोग, मांसपेशियों की ऐंठन, हार्मोनल समस्याओं में भी फायदेमंद है.
– खस के तेल की मालिश करने से कमरदर्द, मोच में आराम मिलता है. खस के तेल का अरोमाथेरेपी में भी प्रयोग किया जाता है. खस की खुशबु से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है, नर्वस सिस्टम शांत होता हैं और डर, असुरक्षा की भावनायें दूर होती है. खस के तेल की महक स्ट्रेस दूर करने, नींद लाने में सहायक होती है.
– खस के पौधे लगाने का सबसे बड़ा फायदा तो पर्यावरण को होता है. सदियों से जानकार भारतीय किसान खस के पौधे लगाकर मृदा संरक्षण (soil conservation) यानि भूमि के कटाव रोकने, जल शुद्धिकरण व जल संरक्षण (water conservation) करते आ रहे हैं. https://indianjadibooti.com/Jadistore/Khus-Root
 

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बालो को प्राकृतिक रूप से मुलायम ,चमकदार और काला बनाने का प्राकृतिक उपाय

बालो का मुलायम होना : १०० ग्राम कपूर कचरी , १०० ग्राम नागरमोथा , ४० ग्राम कपूर , ४० ग्राम रीठा , २५० ग्राम शिकाकाई ,२०० ग्राम आवला
सभी को एक साथ लेकर चूर्ण बना ले फिर इस चूर्ण को लगभग ५० ml की मात्रा मे पानी मिलाकर लेप बना ले ।इस लेप को बालो मे लगाए । इसके बाद बालो को पानी से अच्छे से साफ़ कर  ले  इससे सर के अंदर की जू -लीखे मर जाती है और बाल मुलायम हो जाते है रीठा ,आवला , शिकाकाई को मिलाने के बाद बाल धोने से बाल सिल्की , चमकदार , रुसी -रहित  और घने हो जाते है 

बालो को काला करना : २५०-२५० रीठा और सूखा आवला पिसा हुआ और २५ -२५ ग्राम शिकाकाई की फली ,मेहँदी की सूखी पत्तिया तथा नागरमोथा को मिलाकर एक साथ पीस ले । शैम्पू त्यार है इसका एक बड़ा चम्मच पानी मे उबालकर इससे सर को धोये   बाल काले हो जायेंगे
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पीपल की जड़(पीपरा मूल ) उत्तेजक ,पाचक ,पित्तकारक , वात, उदर रोग ,प्लीहा रोग , गुल्म ,कृमि ( कीड़े ) , श्वास (दमा), तथा टी   बी के रोगो का नाश करता है
विभिन्न रोगो मे उपचार
मूर्छा (बेहोशी ) : पीपरामूल और सर्पगंधा को महीन पीसकर चूर्ण बना ले इस चूर्ण को १ से २ ग्राम सौंफ के रस के साथ सुबह शाम रोगी को खिलाने से बेहोशी दूर हो जाती है
हिरदय रोग : २५ ग्राम पिपरा मूल ,२५ ग्राम  छोटी इलायची को कूट पीसकर चूर्ण   बना ले इस चूर्ण को ३ ग्राम प्रतिदिन घी के साथ सेवन करने से कब्ज की समस्या से उत्पन हिरदय रोगो मे लाभ होता है
हिरदय की दुर्बलता : आधा ग्राम पीपली चूर्ण का सेवन शहद के साथ करने से हिरदय की दुर्बलता मिटती है और कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रहता है
खस के १० ग्राम चूर्ण मे पीपलामूल का १० ग्राम चूर्ण मिलाकर प्रतिदिन २ ग्राम मात्रा मे गाय के २ ग्राम दूध के साथ सेवन  करने से हिरदय के दर्द मे लाभ होता है
 गले के रोग : १० ग्राम पीपरामूल ,१० ग्राम अमलवेत, १० ग्राम सोंठ , १० ग्राम काली मिर्च , १० ग्राम छोटी पीपल ,१० ग्राम तेजपत्ता , १० ग्राम समय का दाना ,१० ग्राम इलायची दाना , १० ग्राम तालीसपत्र ,१० ग्राम दालचीनी , १० ग्राम सफ़ेद जीरा , १० ग्राम चित्रक की जड़ की छाल को बारीक़ पीसकर चूर्ण बना ले इस चूर्ण मे कम से कम एक साल पुराना गुड़ मिलाकर रख दे यह चूर्ण सुबहा शाम ४ ग्राम की मात्रा मे 
गाय के दूध के साथ खाने से बिगड़ा हुआ जुकाम , खांसी और स्वरभेद (गला  बैठ जाना) ठीक हो जाता है 

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Monday, 10 February 2020

पीपल

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पीपल  के पेड़ के अनेक अलौकिक गुणों के कारण इसे हिन्दू लोग बहुत ही पवित्र मानते है और पूजा करते है पीपल पाचनशक्ति वर्धक ,वातकफनाशक ,दमा, खांसी , बुखार , चर्म रोग , प्रमेह ,बवासीर , शूल तथा आमवत आदि रोगो मे लाभकारी है
विभिन्न रोगो मे उपचार 
6 ग्राम पीपल पेड़ की जड़ के चूर्ण को 5 कालीमिर्च के साथ बारीक़ पीसककर और छानकर पीने से और इसी को श्वेत कुष्ठ  पर लगाने से श्वेत कोढ़ दूर होता है
पीपल की सूखी छाल की राख बनाकर फोड़े पर लगाने से फोड़े सुखकर ठीक हो जाते है
1 ग्राम की मात्रा मे पीपल का चूर्ण शहद  के साथ चाटने  से हिचकी आना बंद हो जाती है
पीपल की छाल का काढ़ा रोगी को पिलाने से  मुत्रकृच्छ मिट जाते है
पीपल के पत्तो को पीसकर सेंधानमक डालकर पीने से लाभ होता है
पीपल की लाख का चूर्ण घी और शहद मे मिलाकर रोगी को पिलाने से टी बी का रोग ठीक हो जाता है
10 ग्राम पीपल के पत्तो का रस 60 ग्राम हीरा बोल मे 2 गुनी मात्रा मे शहद को मिलाकर पिलाने से हिरदाय के अंदर रुका हुआ खून का नाश हो जाता है 

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benefits of nagkesar

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नागकेसर का रंग पीला होता है नागकेसर खाने मे कषैला , रुखा और हल्का होता है यह एक पेड़ का फूल है इसकी सुगंध तेज होती है नागकेसर ठंडी प्रकृति वाले व्यक्तियों के लिए लाभकारी है यह मोटापे को दूर करके रक्तशोधक होता है दांतो को मजबूत और ताकतवर बनाता  है   

 विभिन्न रोगो मे उपचार : कफ वाली खाँसी  मे 1  ग्राम  नागकेसर को माखन और मिश्री के साथ सुबह शाम  रोगी को सेवन कराने से  खांसी नष्ट  होती है
बवासीर : नागकेसर का चूर्ण  ६ ग्राम , माखन १० ग्राम, और मिश्री ६ ग्राम लेकर मिला ले इस मिश्रण को ६-७ दिनों तक रोज़ाना चाटने से खून का गिरना बंद हो जाता है
मासिक धरम सम्बन्धी विकार : नागकेसर ,सफ़ेद चन्दन ,अशोक की छाल सभी को 10-10  ग्राम की मात्रा मे लेकर चूर्ण बना ले फिर इसमें से 1 चम्मच चूर्ण सुबह शाम 1 चम्मच ताजे पानी के साथ सेवन करने से मासिक धरम के विकारो मे लाभ मिलता है
प्रदर रोग : 40  ग्राम नागकेसर , 30 ग्राम मुलहठी ,30 ग्राम राल, 100 ग्राम मिश्री ले कर कूट छानकर  चूर्ण बना ले इसे 3-4 ग्राम की मात्रा मे मिश्री मिले ग्राम दूध के साथ सुबह शाम सेवन करने से सभी प्रकार के  प्रदर रोग मिट जाते है
जुकाम : नागकेसर के पत्तो का लेप सर पर लगाने से बहुत तेज जुकाम  भी ठीक हो जाता है
गठिया रोग : नागकेसर के तेल के बीजो की मालिश करने से गठिया रोग दूर हो जाता है
गैस : नागकेसर की जड़ और छाल को मिलाकर काढ़ा बना ले रोज़ाना  दिन मे २ से ३ बार सेवन करने से गैस मे
लाभ होता है

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Friday, 7 February 2020

prakratik manjan

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नीम के बारे मे एक अच्छी कहावत है की नीम खाने मे कड़वा होता है परन्तु काफी गुणकारी होती है इसलिए इसका प्रयोग करना  चाहिए
नीम की दातुन करने से दांतो के रोगो मे लाभ मिलता है

 नीम का प्राकृतिक मंजन:
नीम जड़ छाल पाउडर ५० ग्राम ,
 सोना गेरू ५० ग्राम ,
सेंधा नमक १० ग्राम को पीसकर ,नीम के पत्तो का रास मिलाकर सुखाकर शीशी मे रख दे इसका मंजन करने से दांतो मे से खून का गिरना ,पीव का आना , मुँह मे छाले पड़ना, मुँह से दुर्गन्ध का आना , जी मिचलाना आदि रोगो से छुटकारा मिलता है 

अथवा

 नीम की टहनी और पत्तियों को छाया मे सुखाने के बाद जलाकर रख बना ले इसे पीसकर मंजन बना  ले सुगंध और स्वाद के लिए इसमें लौंग ,पिपरमेंट , और  नमक को मिला  ले इससे पाइरिया ठीक हो जाता है

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नीम के बारे मे एक अच्छी कहावत है की नीम खाने मे कड़वा होता है परन्तु काफी गुणकारी होती है इसलिए इसका प्रयोग करना  चाहिए यह वात, पित्त , कफ ,खून को साफ़ करने वाली होती है नीम मलेरिया ,दांतो के रोग ,कब्ज़ , पीलिया ,बालो के रोग , कुष्ठ , दाह (जलन) ,रक्त पित्त , सर मे दर्द ,उलटी ,प्रमेह (वीर्य विकार ), वायु ( गैस ) थकावट , भूख को बढ़ाने वाला , पेट मे कीड़े , विष ,आँखों के रोग , प्रदर आदि रोगो को नष्ट करती है 
विभिन्न रोगो मे उपचार :

नीम की सुखी निबोली को रीठा के साथ बारीक़ पीस ले एक गिलास पानी मे २ चम्मच  घोलकर इससे बालो कि जड़ो मे अच्छे से लगा ले इससे सर  की जुए, लीखे, सर की दुर्गन्ध खतम हो जाती है तथा बल काले और मुलायम होते है

 खसरे के रोगी को नीम के पानी से नहलाने से जलन काम होती है

नीम के पत्ते १० ग्राम ,बेर के पत्ते १० ग्राम दोनों  को अच्छी  तरह पीसकर इसका लेप बना ले इस लेप को गंजे सर पर मालिश करके १से २ घंटे बाद धोने से बाल उग जाते है इसका प्रयोग १ महीने तक करने से लाभ होता  है

नीम की जड़ को पानी मे घिसकर लगाने से कील मुहासे पूरी तरह समाप्त हो जाते है और चेहरा सूंदर बन जाता है
 नीम की पतली टहनी को दांतो से चबाचबा कर सुबह शाम दातुन करने से दांतो और मसूड़ों के दर्द मे छुटकारा मिलता है 

नीम की १० से १५  हरी पत्तियों को १ गिलास पानी मे उबाले इसके बाद इसमें आधा चम्मच फिटकरी को मिलाकर पानी को छान ले  इस पानी से आँखों को ३ बार सेकने से आँखों की सूजन और खुजली ठीक हो  जाती है 

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Thursday, 6 February 2020

benefits of kali mirch

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काली मिर्च का प्रयोग अनेक प्रकार के रोगो  को दूर करने के लिए किया जाता है  कालीमिर्च तेज व् हलकी चरपरी होती है यह भोजन के प्रति रुचि पैदा करने वाली ,स्वाद को बढ़ाने वाली ,कफ को समाप्त करने वाली ,पाचन शक्ति को बढ़ाने वाली तथा वातदोष गैस को नाश करने वाली होती है यह कीड़ो को नष्ट करती है ,दर्द और खांसी को दूर करती है यह हिरदय के  लिए भी लाभकारी है 

सीताफल के १० से १२ बीज व् ५ -६ काली मिर्च को मिलाकर पीस ले और इसे सरसो के तेल मे मिलाकर लेप त्यार कर ले यह लेप रात को सोने से  पहले बालो की जड़ो मे लगाए और सुबह बालो को धोये इस तरह कुछ दिनों तक यह प्रयोग करने से जुए खतम होती है 

कालीमिर्च ,लौंग और तुलसी के पत्ते को पानी के साथ पीसकर लेप बनाकर  माथे पर लगाने से सिरदर्द मे जल्दी  लाभ मिलता है
      
माइग्रेन से पीड़ित रोगी को १० ग्राम काली  मिर्च चबाचबा कर खाना चाहिए और उप्पर से २५ ग्राम देसी घी पीना चाहिए इससे माइग्रेन मे जल्दी आराम मिलता है

८ कालीमिर्च को पीसकर लगभग ३० ग्राम माखन और चीनी के साथ मिलाकर चाटने से दिमाग की कमजोरी दूर होती है

काली मिर्च १० ग्राम , मुलेठी १० ग्राम तथा मिश्री २० ग्राम इन सभी को पीसकर चूर्ण बना ले चुटकी भर चूर्ण शहद के साथ सुबहा शाम खाये इसके सेवन से गला साफ़ होता है और आवाज सुरीली बनती है
   , 
एक निम्बू को बीच से काटकर दो ट्कड़े कर ले और फिर इसके एक टुकड़े को बिना काटे ४ भाग मे बाँट  ले अब इसके एक भाग मे कालीमिर्च का चूर्ण , दूसरे में  सोंठ का चूर्ण  तीसरे व् चौथे  मे मिश्री या चीनी डालकर रात को एक प्लेट मे रखकर ढक दे  सुबह उठकर इससे तवे पर गर्म करके चूसने से पाचनशक्ति मजबूत होती है और भूख भी लगती है 

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Wednesday, 5 February 2020

जायफल का विभिन्न रोगो मे उपचार

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                                        जायफल का विभिन्न रोगो मे उपचार 

हिचकी : तुलसी के रस मे जायफल को घिसकर एक चम्मच की मात्रा मे तीन बार खाये  इससे हिचकी बंद हो जाती है

सर दर्द : कच्चे दूध मे जायफल घिसकर सर मे लगाए इससे आराम मिलेगा

मुँह के छाले : जायफल के काढ़े से ३-४ बार गरारे करे इससे मुँह के छाले खतम हो जायेंगे

बच्चों के दस्त : जायफल को पानी मे घिसकर दिन मे खुराक के रूप मे पीने से सर्दी लगने से बच्चों को होने वाले दस्त मे लाभ होता है

मुहासे : कच्चे दूध मे जायफल घिसकर रोज़ाना सुबह और रात मे पुरे चेहरा पर लगाए इससे मुहसो के अलावा चेहरा के काले धब्बे भी दूर होंगे

गैस , कब्ज : नीम्बू के रस मे जायफल घिसकर २ चम्मच की मात्रा मे सुबह शाम भोजन के बाद सेवन करने से गैस, कब्ज दूर होगा

मुँह की दुर्गन्ध : जायफल के छोटे टुकड़ो को दिन मे २ -३ बार चूसते रहने से मुह की दुर्गन्ध  और फीकापन दूर होता है

दुर्बलता : जायफल १० ग्राम जावित्री १० ग्राम और अश्वगंधा ५० ग्राम मिलाकर पीस ले  एक एक चम्मच दूध के साथ रोज ले

दमा: १ ग्राम जायफल और एक ग्राम लौंग के चूर्ण मे ३ ग्राम सेहद और एक रत्ती बंग भस्म मिलाकर खाने से स्वास रोग मे लाभ मिलता है



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जीरे के फायदे

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जीरा अपच और दर्द को खतम करता है जीरा औषधियों मे बहुत उपयोग किया जाता है  जीरा तीन प्रकार का होता है  सफ़ेद जीरा ,शाही जीरा या काला जीरा और कलोंजी जीरा इनके गुण एक जैसे होते है तीनो ही जीरे रूखे  और तीखे होते है  यह  मलावरोध ,बुद्धिवर्धक , पित्तकारक ,रुचिकारक, बलप्रद ,कफनाशक और नेत्रों के लिए लाभकारी है शाही जीरे का उपयोग

विभिन्न रोगो मे उपचार :

दांतो का उपचार : काले जीरे के उबले हुए पानी से कुल्ला करने पर दांतो का दर्द दूर होता है
३ ग्राम जीरे को भूनकर चूर्ण बना ले तथा उसमे ३ ग्राम सेन्धा नमक मिलाकर बारीक़ प[ईसकेर मंजन बना ले इस मंजन को मसूड़ों पर मलने से सूजन और दांतो का दर्द खतम होता है

पेशाब का बार बार आना : जीरे , जायफल और काला नमक २-२ ग्राम की मात्रा मे कूटपीसकर  चूर्ण बना ले फिर इस चूर्ण को अनानास के रास के साथ खाने से आराम मिलता है

 पाचक चूर्ण : जीरे ,सोंठ, सेंधा नमक पीपल,काली मिर्च ,सभी को सामान मात्रा मे लेकर चूर्ण बना ले इस चूर्ण को एक चम्मच खाना खाने के बाद तजा पानी के साथ खाने से भोजन जल्दी पच जाता है

स्तनों मे दूध की वृद्धि : सफ़ेद जीरे , मिश्री तथा सौंफ  तीनो का सामान मात्रा मे चूर्ण बना कर  रख ले इससे एक चम्मच की मात्रा मे दिन मे तीन बार लेने से प्रसूता स्त्री के दूध मे वृद्धि होती है 
सफ़ेद जीरे तथा सांठी के चावलों को दूध मे पकाकर पीने से कुछ ही दिनों मे स्तनों का दूध बढ़ जाता है

रतौंधी : जीरे का चूर्ण का सेवन करने से रतौंधी मे लाभ होता है

बुखार : जीरे का ५ ग्राम चूर्ण पुराने गुड़ के साथ मिलाकर खाने से बुखार व् जीर्ण बुखार उतर जाता है .


Tuesday, 4 February 2020

benefits of jatamansi

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जटामांसी   हिमालय मे उगने वाली एक मशहूर औषधि   है इसे जटामांसी इसलिए कहते है क्योकि इसकी जड़ मे बाल जैसे तंतु लगे  होते है

जटामांसी के लाभ :

उच्च रक्तचाप :   जटामांसी ,ब्राह्मी और अश्वगंधा का चूर्ण समान मात्रा  मे  मिलाकर 1-1  चम्मच की मात्रा की मात्रा मे  दिन मे तीन बार ले 

नींद न आना : 1 चम्मच जटामांसी पाउडर रात को सोने से एक घंटा पहले ताजे पानी के साथ ले  इससे नींद न आने की बीमारी दूर हो जाती है

 पेट मे दर्द : जटामांसी 200 ग्राम , मिश्री 200 ग्राम शीतलचीनी 50 ग्राम सौंफ 50 ग्राम सौंठ 50 ग्राम और दालचीनी 50 ग्राम को मिश्री के साथ पीसकर चूर्ण बना ले इसे 3  ग्रामं की मात्रा मे सुबह और शाम सेवन करने से पेट के दर्द मे लाभ होता है

 मुँह की दुर्गन्ध : जटामांसी , सौंफ ,नरकचूर, बड़ी इलायची , सफ़ेद जीरा , और बालछड़ 10-10 ग्राम लेकर कूट ले इसमें 70 ग्राम खांड मिलाकर रखे प्रतिदिन 5-5 ग्राम मिश्रण पानी के साथ सुबह शाम खाने से मुँह की बदबू व् मुँह मे लार आना बंद हो जाता है

रक्तपित्त: जटामांसी चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1 ग्राम  नौसादर के साथ सुबह शाम खाने से रक्तपित्त और खून की उल्टी ठीक हो जाती है   





हरड़ के चमत्कारिक फायदे

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                                                         हरड़ के चमत्कारिक फायदे


हरड़ का पेड़ पूरे भारत मे पाया जाता  है हरड़ को हरीतकी , अभया, अमृता आदि भी कहा जाता है आयुर्वेद के अनुसार हरड़ मे पांचों रस मधुर , तीखा ,कड़वा , कषैला और अम्ल पाए जाते है यह स्वाद मे कसैली, प्रकृति मे गरम , त्रिदोषनाशक , आयुवर्धक , पुस्टिकारक, पाचनशक्तिवर्द्धक ,बुद्धिप्रदायक , बलवर्धक ,पाचक, मलशोधक  , वायु दूर करने वाली ,आँखों के लिए हितकारी ,बुढ़ापा दूर करने वाली होती है  यह पेट के दर्द , उल्टी, हिचकी , दर्द, पेट के कीड़े , बवासीर , कब्ज , खांसी , बुखार , मलेरिया ,पथरी , आँखों के रोग , पीलिया और प्रमेह मे  गुणकारी  है
विभिन्न्न  रोगो मे उपचार :
मुँह के छाले : छोटी हरड़ को बारीक़ पीसकर छालो पर लगाने से मुँह व् जीभ के छाले नष्ट हो जाते है
गैस : हरड़ , निशोथ , जवाखार और पीलू को बराबर मात्रा मे पीसकर चूर्ण बना ले इसमें से आधा चम्मच चूर्ण सुबह शाम खाने से लाभ होता है
छोटी हरड़ को पानी मे भिगो दे रात का खाना खाने के बाद चबाकर खाने से पेट साफ़ हो जाता है और गैस भी नहीं बनती
एक्ज़िमा : गोमूत्र  मे हरड़ को पीसकर लेप त्यार करे रोजाना २-३ बार लगाने से एक्ज़िमा ठीक हो जाता है
बच्चो के पेट के रोग :हर  हफ्ते  हरड़ को घिसकर एक चौथाई चम्मच की मात्रा मे शहद के साथ सेवन कराते रहने से  बच्चो के पेट के सारे रोग दूर हो जाते है
बुद्धि   के लिए : भोजन के दौरान सुबह शाम आधा चम्मच की मात्रा मे हरड़ का चूर्ण सेवन करते रहने से बुद्धि और शारीरिक बल मे वृद्धि होती है
खांसी : हरड़ और बहेड़ा का चूर्ण शहद के साथ  लेना चाहिए
दर्द : हरड़ का चूर्ण घी और गुड़ के साथ देना चाहिए
आँख के रोग : त्रिफला  चूर्ण के साथ आधा चम्मच हरड़ का चूर्ण घी के साथ ले इससे नेत्रों के रोगो मे लाभ  मिलता है
पेशाब  की जलन : हरड़ के चूर्ण मे शहद मिलाकर चाटकर खाने से , पेशाब  करते समय होने वाली जलन और दर्द खत्म हो जाता है
आंत्रवृद्धि : हरड़ के बारीक़ चूर्ण मे कालानमक ,अजवाइन , और हींग मिलाकर ५ ग्राम की मात्रा मे सुबह -शाम हलके गर्म पानी के साथ खाने या इस चूर्ण का काढ़ा बनाकर पीने से आंत्रवृद्धि की विकृति ख़त्म होती है
हरड़ ,मुलहठी, सौंठ १-१ ग्राम पाउडर रात को पानी के साथ खाने से लाभ होता है
श्वास या दमा रोग : हरड़ ,बहेड़ा ,आमला और छोटी पीपल चारो को बराबर मात्रा मे  लेकर उसका चूर्ण तैयार कर लेते  है इसे एक ग्राम तक की मात्रा मे शहद के साथ मिलाकर चाटने से श्वास युक्त  खांसी खत्म हो  जाती है 

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Saturday, 1 February 2020

फिटकरी के कमाल के फायदे

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फिटकरी के गुण : शरीर  की त्वचा ,नाक,आँखे ,मूत्रांग पर इसका बाह्य प्रयोग किया जाता है खून बहना ,दस्त , कुकरखांसी , तथा दमा मे इसके  आंतरिक सेवन से लाभ मिलता है  दाढ़ी बनाने , बाल काटने के बाद फिटकरी रगड़े  जहा पर चीटिया या दीमक हो वह पर सरसो का तेल लगाकर फिटकरी को डालने से चीटिया व् दीमक नहीं आती
विभिन्न रोगो मे उपचार :
टॉन्सिल का बढ़ना : 5 ग्राम फिटकरी और 5 ग्राम नीले थोथे को अच्छी तरह से पकाकर इसके अंदर 25 ग्राम गिलीसरीन मिलाकर रख ले फिर  साफ़ रुई से इसे गले के अंदर लगाने और लार टपकाने से टॉंसिलो की सूजन समाप्त हो जाती है
खूनी बवासीर : भूनी फिटकरी 10 ग्राम ,रसौत  10 ग्राम और 20 ग्राम गेरू को पीसकूट व् छान ले इसे रोज़ 3-3 ग्राम की मात्रा मे सुबह शाम खाने से खूनी बवासीर मे लाभ मिलता है
घाव : २ ग्राम भूनी हुई फिटकरी ,२ ग्राम सिन्दूर और 4 ग्राम मुर्दासंग लेकर चूर्ण बना ले 120 mg मोम और 30 ग्राम गहि को मिलाकर धीमी आग पर पका ले फिर इसमें  बाकि वस्तुओ का चूर्ण मिला ले इस तैयार मलहम को घाव पर लगाने से सभी प्रकार के घाव ठीक हो जाते ही 
दांतो का दर्द : भूनी फिटकरी , सरसो का तेल , सेंधा नमक , नौसादर ,सांभर नमक 10-10 ग्राम तथा तूतिया 6 ग्राम को मिलाकर बारीक पीसकर कपडे से छान ले इसे दांतो पर  मलने से दांतो का दर्द , हिलना ,तीस मारना, मसूड़ों का फूलना ,तथा पायरिया रोग ठीक हो जाता है
श्वास दमा : आधा ग्राम पीसी हुई फिटकरी शहद  मे मिलाकर चाटने से दमा ,खांसी मे आराम आता है
सोंठ 1 गांठ  , फूली हुई सफ़ेद फिटकरी 2 ग्राम ,हल्दी 1 गांठ ,5 कालीमिर्च को चीनी मे मिलाकर खाने से श्वास और खांसी दूर हो जाती है


इन्द्रायण के फायदे

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                                            इन्द्रायण के फायदे 

इन्द्रायण : यह कफ पित्तनाशक है और यह पीलिया ,पेट के रोग,  श्वास (दमा) ,खांसी  ,सफ़ेद दाग, गैस , गांठ , प्रमेह , गले  मे गिल्टी का हो जाना तथा विष को नष्ट करता है 
इन्द्रायण का उपयोग: इन्द्रायण के  बीजो का तेल नारियल के तेल मे मिलाकर लगाने से बाल  काले  हो जाते है
 मूत्रकच्छ : 10 से 20 ग्राम लाल इन्द्रायण की जड़ ,हल्दी ,हरड़ की छाल, बहेड़ा , और आवला को 160 ml पानी मे उबालकर इसका चौथाई हिस्सा  बाकि रह जाने पर काढ़ा बनाकर उसे शहद के साथ सुबह शाम सेवन करने से मूत्रकच्छ का रोग समाप्त हो जाता है 
मासिक -धरम की रूकावट : 3 ग्राम इन्द्रायण के बीज और पांच दाने कालीमिर्च को एक साथ पीसकर 200 ml पानी मे उबालकर काढ़ा बना ले इस काढ़े को छानकर रोगी को पिलाने से रुका हुआ मासिक धरम दुबारा शुरू हो जाता है 
 घुटनो का  दर्द : इन्द्रायण जड़ और पीपल के चूर्ण को बराबर मात्रा मे लेकर गुड़ मे मिलाकर 10 ग्राम की मात्रा मे रोज़ाना  सेवन करने से  संधिगत  वायु दूर होती है 
शरीर मे सूजन होने पर इन्द्रायण की जड़ को सिरके मे पीसकर लेप की तरह  शरीर पर लगाने से सूजन दूर हो जाती है  

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