Wednesday, 31 July 2019

अमलतास


 अमलतास पीले फूलो वाला एक शोभाकर वृक्ष है।
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GOODA AMALTAS

आयुर्वेद में इस वृक्ष के सब भाग औषधि के काम में आते हैं। कहा गया है, इसके पत्ते मल को ढीला और कफ को दूर करते हैं। फूल कफ और पित्त को नष्ट करते हैं। फली और उसमें का गूदा पित्तनिवारक, कफनाशक, विरेचक तथा वातनाशक हैं फली के गूदे का आमाशय के ऊपर मृदु प्रभाव ही होता है, इसलिए दुर्बल मनुष्यों तथा गर्भवती स्त्रियों को भी विरेचक औषधि के रूप में यह दिया जा सकता है।अफारा ,मुंह में पानी आना आदि लक्षणों में भी इसका उपयोग किया जाता है
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अमलतास के चमत्कारी लाभ और उपयोग।।1-कफ के कारण टान्सिल बढ़ने पर अमलतास का पानी पीने में आराम मिलता है। टान्सिल में जब दर्द हो रहा हो तब 10 ग्राम अमलतास (amaltas) को थोड़े जल में पकाएं। इसे बूंद-बूंद कर मुंह में डालते रहने से आराम होता है।2-अमलतास की 5-10 ग्राम गूदे को पानी में घोटें। उसमें तीन गुना चीनी का बूरा डाल लें। इसे गाढ़ी चाशनी बनाकर चटाने से सूखी खांसी ठीक होती है।3-अमलतास फल मज्जा(गूदा) को पिप्पली की जड़, हरीतकी, कुटकी एवं मोथा के साथ बराबर भाग में मिलाएं। इसका काढ़ा बनाकर पीएं। इससे कफ में लाभ होता है।4-अमलतास के फल (amaltas ki phali) का गूदा का काढ़ा बना लें। इसमें 5-10 ग्राम इमली का गूदा मिलाकर सुबह और शाम पीएं। यदि रोगी में कफ की अधिकता हो तो इसमें थोड़ा निशोथ का चूर्ण मिलाकर पिलाने से विशेष लाभ होता है।5-दमा या श्वसनतंत्र विकार को ठीक करने के लिए अमलतास फल के गूदे का काढ़ा बना लें। इसे पिलाने से सांसों की बीमारी में लाभ होता है।6-अमलतास की फली को पीसकर बच्चों की नाभि के चारों ओर लेप करें। इससे पेट के दर्द से आराम मिलता है।7-अमलतास फल के 10 से 20 ग्राम गूदे को रात में 500 मिली पानी में भिगो दें। इसे सुबह मसलकर छानकर पीने से पेट साफ हो जाता है और पेट की गंदगी बाहर निकल जाती है।https://indianjadibooti.com/Jadistore/Gooda-Amaltas 


Thursday, 25 July 2019

Cinnamon world's No.1 spice

  Cinnamon is the most popular and one of the oldest spice originate from Sri Lanka. It is made of inner bark of cinnamomum tree. This bark contain several compound including cinnamaldehyde, cinnamic acid and cinnamate. There are two type of cinnamon : ceylon and cassia. cassia Cinnamon is widely available in the market. ceylon grows  primarly in Sri Lanka and isn't common. Cinnamon is known for its health benefit and has been used medically for thousand for year. It can be used in wide range of dishes - cookies, cakes, muffins, tea and coffee. 

Health Benefits of Cinnamon Powder:
  • Lowers blood sugar level- Daily consumption of Cinnamon powder can help improve insulin sensitivity and blood sugar level. 
 
  • weight loss- Cinnamon helps in reducing bad effect of eating high fat food. it effects of blood glucose level can also help your body ultimately loose weight.

  • Fights infection and virus- Cinnamon contain natural antibiotic, antimicrobial, antifungal and antivirus properties which helps in boosting immune system and fight with virus.

  • Benefit skin health- Cinnamon contains antibiotic and antimicrobial properties which protect the skin from rashes, allergic reaction, irritation and infection.
                                             

Tuesday, 23 July 2019

हरड़

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हरड़ का पेड़ भारत के अधिकांश प्रान्तों में पाया जाता है... आमतौर पर इसका पेड़ 18 से 24 मीटर तक ऊंचा होता है.... इसका तना मजबूत, लंबा, सीधा और छाल मटमैली होती है....इसके पत्ते 3 से 8 इंच लंबे और लगभग 2 इंच चौड़े होते है ... मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तरांचल, उत्तर प्रदेश, उड़ीसा, बिहार और दक्षिण भारत में हरड़ बहुत होता है वही असम में सबसे अधिक हरड़ के पेड़ है.... आयुर्वेद में हरड़ को हरीतकी तथा अभया नामों से जाना जाता हैं ...... रोगों को दूर करने के कारण हरड़ को हरीतकी कहा गया है..... हरड़ का एक नाम प्रमथा भी है.... इसका अर्थ है रोगों को मथकर उन्हें जड़-मूल से नष्ट करने वाली....।


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आयुर्वेद के अनुसार हरड़ में लवण रस को छोड़कर शेष सभी रस होते हैं....हरड़ के संहिता में सात प्रकार बताये है.... पर आजकल बाजार में सिर्फ 3 प्रकार की हरड़ ही उपलब्ध हैं- 1. बाल हरड़-इसे जवाहरड़ भी कहते हैं। 2. पीली हरड़, 3. बड़ी हरड़। (इसे काबुली हरड़ भी कहते हैं।) तीनों प्रकार की हरड़ों के गुण लगभग समान ही हैं.... हरड़ का कच्चा और छोटा फल जब पेड़ से गिर जाता है, तब उसे छोटी हरड़ कहा जाता है(जिसका चित्र कमेंट बॉक्स में देखे).....दवाई के लिए प्राय: हरड़ के फल का छिलका ही उपयोग में लाया जाता है..... हरड़ में मीठा, खट्टा, कडवा (चरपरा), तीखा और कसैला ये 5 रस होते हैं...।


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हरड़ के सेवन से वात, पित्त और कफ असंतुलन से पैदा हुए रोग-विकार ठीक होते है..... हरड़ आँखों के लिए भी बहुत गुणकारी होती है.... सूजन, पेट के रोग, अर्श, सांस के रोग व खांसी में बहुत लाभप्रद होती है....हरड़ के सेवन से उच्च रक्तचाप में बहुत लाभ होता है.... हरड़, बहेड़ा और आंवला को कूट-पीसकर बनाए गए चूर्ण को “त्रिफला चूर्ण’ कहते है जिसका काफी औषधीय उपयोग है...।



हरड़, वर्षा ऋतु में सेंधा नमक के साथ...शरद ऋतु में शकर के साथ...हेमंत ऋतु में सोंठ के साथ.....शिशिर ऋतु में पीपल के साथ...वसंत ऋतु में शहद के साथ लेना बहुत ही लाभकारी होता हैं...।


Wednesday, 15 May 2019

आईये जानते है सौफ खाने से क्या क्या फायदे हो सकते है और छोटे से नुस्खे से मिल सकता है फायदा पढ़े पूरी ख़बर -

आईये जानते है सौफ खाने से क्या क्या फायदे हो सकते है और छोटे से नुस्खे से मिल सकता है फायदा पढ़े पूरी ख़बर -

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आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसी जड़ी बूटी के बारे में जो हर घर में पहले से मौजूद रहती है इतना ही नहीं उसका प्रयोग हम अपने मसालों में भी करते है | जिसका नाम है सौफ जो की हम माउथफ्रेशनर के लिए इस्तेमाल करते है और इसको हम पाचन क्रिया के लिए भी उपयोग भी करते है ये काफी स्वातिष्ठ और खुशबू दर जड़ी बूटी है और इसमें काफी असरदार जड़ी बूटी होती है इसको खाने के कई फायदे होते है |
आईये जानते है सौफ खाने के क्या क्या फायदे होते है -
सौफ के बीज का सेवन करने से पेट फूलना और कब्ज और एसिडिटी से राहत मिलती है इतना ही नहीं इसको अगर हम रोज़ खाना खाने के बाद 1 चमच सौफ खाये या फिर इसका पाउडर बना कर इसको पानी के साथ पीये तो बहुत फायदेमंद होता है | या फिर जिसको गैस की शिकायत है वो अगर सौफ को उबाल कर इसका सेवन करता तो उसका गैस कभी नहीं बनती है और स्वास्थ भी अच्छा होता है |


सौफ को रोज़ाना खाने से आपका बजन काम हो जाता है क्यूंकि इसको खाने से भूख नहीं लगती है और पाचन सकती अच्छी हो जाती है और वजन काम करने में सहायता करता है |
सौफ पोटैशियम का अच्छा जरिया हो जो की ब्लड प्रेशर के खतरे को काम कर देता है हम आपको बता दे सौफ में विटामिन सी भी शामिल होता है जो की एंटी ऑक्सिडेटेड के रूप में कार्य करता है इसका आलवा इसमें फाइबर की मात्रा ज्यादा पायी जाती है जो की कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करता है और जो की दिल का दौरा जैसी ख़तरनाक बीमारी से निजात पाते हो |

आज हम आपको बताने जा रहे सुबह 10 भीगे हुए किशमिश खाने के घरेलू नुस्खे जिसको रोज़ सुबहः खाने के है कई फायदे जानिए कैसे -

आज हम आपको बताने जा रहे सुबह 10 भीगे हुए किशमिश खाने के घरेलू नुस्खे जिसको रोज़ सुबहः खाने के है कई फायदे जानिए कैसे -

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किसमिश खाने से आपकी उम्र बढ़ जाती है और आपकी चेहरे का ग्लो बढ़ाता है और साथ ही साथ ये आपके चेहरे पर झुर्रियू  को भी हटा देता है | 

वैसे हम आपको बता दे किसमिश कुछ उपाय ऐसे है जिसको कारण आपको मिल सकते है कई फायदे जैसे अगर आपके पेट ख़राब है और आपका  पाचन सकती काम है तो इसको किशमिश का सेवन करने से आपको राहत और मिलेगा जल्द आराम | 



हम आपको बता दे रोज़ किसमिश का सेवन करने से आपकी स्वस्थ समस्या हो जाएगी खत्म क्यूंकि रोज़ इसको खाने से आपको मिलेगा फायदा और आपका स्वस्थ रहेगा फिट इस छोटे से नुस्ख़े को करने से आपको मिलेंगे हेल्थ पर फायदे | 

अगर आपके शरीर में है खून की कमी तो रोज़ इसका करें सेवन इसको रोज़ दूध के साथ किशमिश का सेवन करने से आपकी हेल्थ अच्छी होती है और आपका स्वास्थ भी अच्छा होता है | 

किशमिश में भरपूर मात्रा में आयरन और बहुत सरे तत्व पाए जाते है जिससे ये शरीर में खून की मात्रा बढ़ा देता है  दोस्तों  इस उपाय को जरूर इस्तेमाल करें | 

लाजवन्ती जड़ी बूटी के फायदे जानिए

लाजवन्ती जड़ी बूटी के फायदे जानिए

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आज हम आपको बताने जा रहे है ऐसी जड़ी बूटी के बारे में जो बहुत ही फायदेमंद और चमत्कारी है इतना ही नहीं इसके बहुत सारे लाभ है|  हम आपको बता दे इसका नाम  लाजवन्ती है | लाजवन्ती के पौधे को छुई मुई और शर्मीली के पौधे के नाम से भी जाते है। यह पौधा स्पर्श करते ही अपने आपको सिकुड़ लेता है जिस कारण इस पौधे को लाजवन्ती, छुई मुई, माईमोसा पुदिका व शर्मीली इसका नाम पड़ गया है | आइये जानते है कितने पेड़ होते है और कितना लाभ देते है | यही नहीं  लाजवन्ती ऐसी जड़ी बूटी होती है | इस जड़ी बूटी को इस्तेमाल करने से सभी रोग जड़ से ख़तम हो जाते है |  लाजवन्ती के फूल और पेड़ सारे ही चमत्कारी और लाभ प्रदान करते है | आईये जानते है क्या है फायदे -
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1. अगर  आप लाजवंती के पत्तो को पानी के साथ पीस कर  नाभी के नीचे  अच्छे से उसके घोल को लगते है तो इससे पेशाब में जलन नहीं होता है और आराम देता है ये जड़ी बूटी | 
2. यह  ज्यादा दर हड्डियों व मांस पेशियों में लगी चोट को जल्दी से भर देता है और आराम देता है | 
3. लाजवंती ऐसी जड़ी बूटी है इसको अगर आप अपनी चोट पर रोज़ इसका घोल बना कर अपनी चोट पर लगाते हो तो इससे चोट जल्दी भारने लगती है और आराम देता है | 

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4. इसके बीज भी सबसे ज्यादा गुणकारी व लाभकारी होते है। इसके बीजो को पीसकर दुध के साथ लेने से शारीरिक कमजोरियां दुर होती है।
5. अगर आप वीर्य की समास्या से पीडित है तो लाजवन्ती के बीजों व जडों को पीसकर दुध के साथ पीने से पुरुषो में वीर्य की कमी की शिकायत को काफी हद तक कम करता है।
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पेट की चर्बी से छुटकारा दिलाएगा ये 7 घरेलू नुस्ख़े -

पेट की चर्बी से छुटकारा दिलाएगा ये 7 घरेलू नुस्ख़े -

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आज हम आपको बताने जा रहे है | एक ऐसी जड़ी बूटी के बारे में जो बेहद ही फायदेमंद और चमत्कारी है |    
 सफ़ेद कौंच के बीज आदमी और औरत दोनों को ही  बहुत फायदे करता है | और दोनों को ही इसका सेवन करना चहिये क्यूंकि इसके इस्तेमाल से बहुत फायदे होते है | अगर रोज़ पाउडर को दूध में मिलाकर पिया जाये तो 7 दिन में ही शरीर  में स्टेमिना को डबल कर देता है और एनर्जी लेवल ज्यादा हो जाता है | आयुर्वेद एक्सपर्ट डॉ. अबरार मुल्तानी बता रहे हैं कौंच के बीज किस तरह स्टेमिना बढ़ाते हैं। साथ ही जानिए इसके और भी फायदे।हम एनर्जी के लिए केले खाते हैं। लेकिन जापानी लोग वजन कम करने के लिए सुबह की शुरुआत गुनगुने और केले से करते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इससे वजन तेजी से कम होता है और यह साइंटिफिक प्रूव्ड तरीका है। लेकिन इससे केवल वजन ही कम नहीं होगा, बल्कि और भी कई फायदे मिलते हैं।
कौंच के बीज के फायदे और नुकसान - Kaunch Beej (Mucuna Pruriens) Benefits and Side Effects in Hindi
कौंच के बीज को पीस कर उसका पाउडर बनाये और उसको रात को  पहले दूध में मिलाकर पीने से नींद अच्छी आती है और मस्तिक तेज़ होता है | 

 सफ़ेद  कौंच के बीज मानव के यौन प्रदर्शन और ऊर्जा को बढ़ता है इतना ही नहीं मानसिक तनाव को भी दूर करता है | 
कौंच के बीज का चूर्ण अच्छी नींद के लिए – Kaunch Beej Ke Fayde for better Sleep in Hindi
कौंच के बीज का सेवन बढ़ती उम्र को रोके और आपको सुंदर और आपकी उम्र नहीं ढिकने देता है चहेरे पर इसको इस्तेमाल करने से आप सालो साल सूंदर और यंग लगेंगे | 
कौंच के बीज का सेवन बढ़ती उम्र को रोके – Kaunch Seeds for anti-aging in Hindi
मांसपेशीयों के विकास में कौंच बीज के फायदेमंद और असर दर है | 
मस्तिष्क स्‍वास्‍थ्‍य के लिए कौंच के बीज पाउडर के फायदे – Kapikacchu Ke Fayde for Brain Health in Hindi
कौंच के बीज शुक्राणुओं की संख्या को बढ़ाते है।

खीरे के बीज है लाभकारी -

खीरे के बीज है लाभकारी -

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गर्मी में खीरा खाना हर कोई पसंद करता है इतना ही नहीं उसका  टेस्ट हर कोई पसंन्द करता है वैसे तो लोग खीरा का सलाद बनाना कर खाना पसंद करते है और उसका रायता भी लोगो को बहुत भाता है | खीरे के भी अपने फायदे है इतना ही नहीं खीरे के  फायदे है आप लोग आप  सुन कर हैरान हो जाओगे इतना ही नहीं खीरे के बीज बहुत लाभ करी होते है खीरे के बीज को निकलकर लोग सुखा कर रख लेते है | और उसको इस्तेमाल करते है | 

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1. खीरे के बीज को खाने से पेशाब खुलकर आता है और जलन से राहत देता है इतना ही नहीं लिवर और पिलहा में रहत देता है और गर्मियो में बुखार को शांत करता है आइए जानते है कितना आराम देता खीरे के बीज और क्या क्या फायदे -
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2.  जिसको पेट दर्द और पेशाब करने में जलन होती है अगर वो खीरी और ककड़ी को ताज़ा खाता है तो उसके राहत मिलती है और लाभ होता है | 
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 3. हम आपको बता दे जिसको पथरी की शिकयात है वो भी अगर खीरे के बीज को खाता है रोज़ 10 बीज तो उसको आराम मिलता है और पथरी पेट में नष्ट हो जाती है और दोबारा उत्पन्न नहीं होती है | 
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4.  अगर खीरे और ककड़ी को काट कर इंसान खाता है उसमे नीबू का रस निचोड़कर तो वह स्वस्थ के लिए तो अच्छा होता ही है इसके आलावा जिगर का  बढ़ता है | | 

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करेला के फायदे

करेला के फायदे

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आज हम आपको बता करेला का बीज आपके लिए कितना  फायदेमंद हो सकता है  सोच भी नहीं सकते हो  गर्मियों के सीजन में आने वाली सब्ज़ी करेला जो की हर कोई पसंद करता है इस करेले के है बहुत सारे नुस्के आप सोच भी नहीं सकते है करले को आकर बच्चे खाना पसंद नहीं करते है क्यूंकि उनको हरी सब्ज़ी को देख कर अक्सर ,मुँह बनाते है लेकिन हम आपको बता दे ये डायबिटिक पेशेंट को ही नहीं बल्कि सबके लिए है फायदेमंद वैसे करेले की सब्ज़ी में में प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट, कैल्शियम, आयरन, फास्फोरस, मैग्नीशियम, मैंगनीज, फोलोट, विटामिन सी, विटामिन बी और विटामिन ए का प्रचुर स्त्रोत हैं|
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करेले में आहार फाइबर भी अच्छी मात्रा में होता हैं कैलोरी कम होने के कारण आप फैट लोस के दौरान करेले का सेवन कर सकते हैं इसीलिए आप करेले की सब्जी या फिर करेले के जूस या करेले की भुजिया का सेवन कर सकते हैं.करेला खाना फायदेमंद होता क्योकि करेले की तासिर ठंडी होती हैं | और इतना ही नहीं करेले के बीच का सेवन करने से मिलेंगे बहुत सरे फायदे जानने के लिए पड़े पूरा आर्टिकल -
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करेले के फायदे – Karele Ke Fayde in Hindi-Bitter Gourd Benefits in Hindi-
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1. करेला हमारे शरीर को फायदा करता है इसका सेवन हेल्थ के लिए अच्छा है और ये हमारे शरीर के गंदे खून को साफ़ करके हमारे शरीर में एनर्जी ,और थकान, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता जैसे लक्षण पैदा हो सकते हैं करेला रक्त को साफ करने के लिए जाना जाता हैं इससे आप मुहाँसे आदि से छुटकारा पा सकते हैं|
2.करेला खाने के फायदे कोलेस्ट्रॉल को करें कम करता है और शरीर के मेटाबोलिज्म को तेज़ करता है और फैट ख़तम करता है | 
3. करेला खाने से इम्यून सिस्टम बने स्ट्रोंग तो बनाता ही है और हमारे शरीर को पहले से  ज्यादा  तेज़ करता है | करेला डायबिटिक इंसान के बहुत फायदेमंद होता है इसको  खाने से उनकी हेल्थ अच्छी रहती है | 
4. करेला खाने से इम्यून सिस्टम बने स्ट्रोंग तो बनाता ही है और हमारे शरीर को पहले से  ज्यादा  तेज़ करता है | करेला डायबिटिक इंसान के बहुत फायदेमंद होता है इसको  खाने से उनकी हेल्थ अच्छी रहती है | 
5. हम आपको बता दे करेला हमारे आँखों के लिए सबसे अच्छा है इसका सेवन  करने से आँखों की ताकत बढ़ती है  हमने ऊपर बताया था की करेला विटामिन ए का भी स्त्रोत हैं और आप सभी को पता हैं विटामिन ए हमारी आँखों के लिए फायदेमंद हैं| 
6. करेला में एंटी ऑक्सीडेंट गुण होते है जिससे की फ्री रेडिकल में सुरक्षा करता है करेला का सेवन करने से प्रोस्टेट और ब्रेस्ट कैंसर से बचाता हैं | इतना ही नहीं एक शोध के अनुसार बताया गया है करेला ट्यूमर के विकास पर भी रोक लगाता हैं| करेला के फायदे की वजह से कई लोग घरो में ही करेलो की खेती कर लेते है|

बाकुची इस्तेमाल करने के फायदे -

बाकुची इस्तेमाल करने के फायदे -

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बाकुची (Bakuchi) क्या है -
बाकुची एक ऐसी जड़ी बूटी है जिसको खाने से कई बीमारियों से आपको राहत मिलेगी हम आपको बता दे बाकुची के के पौधे की आयु एक वर्ष होती है लेकिन सही देखभाल करने से बाकुची का पौधा 4-5 वर्ष तक जीवित रह जाते हैं। बाकुची की बीजों से बने तेल और पौधे को चिकित्सा के लिए प्रयोग में लाया जाता है। बाकुची के फूल ठंड के मौसम में लगते हैं और गर्मी में फलों में बदल जाते हैं।
Bakuchi benefits in hindi
बाकुची के फायदे जानिए कैसे -
बाकुची के प्रयोग से दांतों के रोग में आराम मिलता है जैसे आपके दांतो में कीड़ा लगा है और आपको बहुत दर्द है इसको खाने से आपको दर्द में आराम मिलेगा 
जिन लोगो को सांस लेने में परेशानी होती है उसे इस जड़ी बूटी को जरूर खाना चाहिए और इसको बनाने की विधि है  आधा ग्राम बाकुची बीज चूर्ण को अदरक के रस के साथ दिन में 2-3 बार सेवन करें। इससे सांसों के रोग में लाभ होता है।
बाकुची के पत्ते का साग सुबह-शाम नियमित रूप से कुछ हफ्ते खाने से दस्त में बहुत लाभ होता है।  और ये जड़ी बूटी गर्मियो में बहुत असरदार होती है इसका सेवन करने से आपको दस्त और पेट दर्द की बीमारिया नहीं होती है | 
बाकुची के वैसे तो कई फायदे है ये ऐसी जड़ी बूटी होती है जो आयुर्वेदिक होती है और इसको इस्तेमाल करने से आपको ये बीमारियां दोबारा नहीं  होती है इसको आप एक और तरीके से खा सकते है आप  2 ग्राम हरड़, 2 ग्राम सोंठ और 1 ग्राम बाकुची के बीज लेकर पीस लें। आधी चम्मच की मात्रा में गुड़ के साथ सुबह-शाम सेवन करने से बवासीर में लाभ होता है।
बाकुची का उपयोग गर्भधारण रोकने के लिए भी किया जा सकता है। जो महिलाएं गर्भधारण नहीं करना चाहती हैं वे मासिक धर्म से शुद्ध होने के बाद बाकुची के बीजों को तेल (BAKUCHI  Oil) में पीसकर योनि में रखें। इससे गर्भधारण करने की क्षमता समाप्त हो जाती है।

बावची उपयोग करने के फायदे Benefits (Fayde) Of Babchi In Hindi

बावची उपयोग करने के फायदे Benefits (Fayde) Of Babchi In Hindi

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आज हम आपको को कुछ ख़ास नुस्खों के बारे में बताने जा रहे है एक ऐसी जड़ी बूटी जिसको उपयोग करने से मिलेंगे कई फायदे आइए  जानते है वो कोनसे फायदे है बावची एक ऐसी खास जड़ी बूटी है जो पुरे भारत बर्ष में खाली पड़ी कंकरीली भूमि में अन्य झाड़ियों के आसपास अपने आप उग आते हैं, लेकिन कहीं-कहीं इनकी खेती भी की जाती है। बावची के पत्ते और  इकट्ठे समूह में बैंगनी या जामुनी रंग के पुष्प लगते हैं। काले रंग की लंबी फली में मसूर के दाने के समान काले बीज, बेल फल की खुशबू लिए निकलते हैं।

बावची को ज्यादा दर लोग बड़ी बड़ी बीमारियों में उपयोग करते है क्यूंकि ये जड़ी बूटी ऐसी है जिसको खा कर लोग अपनी बीमारियों से निज़ात पते है आइये हम आपको बता दे किन किन बीमारियों में मदद करता है ये बावची -

1 .इसको डॉक्टर ज्यादा दर उन लोगो को बावची खाने को बोलते है जिनको सफ़ेद दाग और कुष्ठ रोग में होते है या फिर उनको तेज़ी से हो रहे होते है |
 
2. अगर खासी भी ज्यादा लोगो को हो जाये तो  बावची खाने से जल्दी ठीक हो जाती है 
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3. इसको लोग ज्यादा दर दंत कृमि पीड़ा में बावची को इस्तेमाल करके लाभ उठाते है 
4. दस्त और पेचिस में बावची का सेवन करने से फायदा तो मिलता ही है साथ ही साथ आराम भी मिलता है 
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5.  जिनको गर्मियो में मुंहासे, दाद – खाज की शिकायत होती है उन लोगो को ये जरूर इस्तेमाल करना चाहिए क्यूंकि इसको इस्तेमाल करने से ये सारी बीमारियूं से निजात मिल जाती है | 
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6.  माथे की बिंदिया का सफेद दाग को भी जड़ से ठीक कर देता है | 
7. गांठ पर लगाये बावची इसको लगाने से आपको आराम तो मिलेगा ही और साथ  आपको जल्दी इसके रिजल्ट मिलेंगे घर बैठे | 
8. पीलिया में बावची चूर्ण का सेवन करने से मिलेंगे जल्दी फायदा और आराम | 
9. बवासीर के लिए बावची का सेवन करना  सबसे ज्यादा फायदेमंद है क्यूंकि ये जड़ी बूटी उसको जड़ से ख़तम कर देती है | 

Monday, 13 May 2019

आज हम आपको बताने जा रहे सुबह 10 भीगे हुए किशमिश खाने के घरेलू नुस्खे जिसको रोज़ सुबहः खाने के है कई फायदे जानिए कैसे -

आज हम आपको बताने जा रहे सुबह 10 भीगे हुए किशमिश खाने के घरेलू नुस्खे जिसको रोज़ सुबहः खाने के है कई फायदे जानिए कैसे -



सभी शुद्ध शक्तिवर्धक जड़ी बूटी और पाउडर खरीदने के लिए log on करें https://indianjadibooti.comकिसमिश खाने से आपकी उम्र बढ़ जाती है और आपकी चेहरे का ग्लो बढ़ाता है और साथ ही साथ ये आपके चेहरे पर झुर्रियू  को भी हटा देता है | 


वैसे हम आपको बता दे किसमिश कुछ उपाय ऐसे है जिसको कारण आपको मिल सकते है कई फायदे जैसे अगर आपके पेट ख़राब है और आपका  पाचन सकती काम है तो इसको किशमिश का सेवन करने से आपको राहत और मिलेगा जल्द आराम | 

हम आपको बता दे रोज़ किसमिश का सेवन करने से आपकी स्वस्थ समस्या हो जाएगी खत्म क्यूंकि रोज़ इसको खाने से आपको मिलेगा फायदा और आपका स्वस्थ रहेगा फिट इस छोटे से नुस्ख़े को करने से आपको मिलेंगे हेल्थ पर फायदे | 

अगर आपके शरीर में है खून की कमी तो रोज़ इसका करें सेवन इसको रोज़ दूध के साथ किशमिश का सेवन करने से आपकी हेल्थ अच्छी होती है और आपका स्वास्थ भी अच्छा होता है | 

किशमिश में भरपूर मात्रा में आयरन और बहुत सरे तत्व पाए जाते है जिससे ये शरीर में खून की मात्रा बढ़ा देता है  दोस्तों  इस उपाय को जरूर इस्तेमाल करें | 

Sunday, 12 May 2019

Gond Katira Sharbat – A cooling drink to beat the heat of summer

Gond Katira Sharbat – A cooling drink to beat the heat of summer



So here are the summers, and with it comes the issues like heat strokes , burning sensations, dehydration. But hey wait, this summer we athttps://indianjadibooti.com would give you the cooling and delicious recipes that would not leave this heat issues disappear like a smoke, but it will make your summers so much interesting that you would wish that the summers never go. The recipes that will leave you keep craving for more and more.

Make it as a daily drink at home, or prepare it at house parties and be the cooking queen in the eyes of the guests. This recipe would never let you fail. So using no more words, let’s come in action and enjoy our Gond Katira Sharbat. It is also known as Tragacanth Gum in English and Badam pisin in South India. This gond is different from what is used in making Laddus. It can be bought from nearby stores, or online from https://indianjadibooti.com/Jadistore/Gond-Katira-Tragacanth 

Ingredients

1.   Gond Katira – 2 Tablespoon

2.   Chilled Water – 3 Cups

3.   Chilled Milk – 5 Cups

4.   Rose Syrup or Rooh Afzah – 10 Tablespoon

6.   Sugar as per the taste



Recipe:



1.   Wash 2 tablespoon of Gond Katira, and soak it in a bowl of water at night for at least 8 to 9 hours.  Remember Small is big for Gond katira. Just 2 tablespoon of Gond katira would give you a bowl full of jelly after being soaked overnight.

2.   Remove extra water from the bowl in morning, and Rinse the jelly thoroughly in water to remove the dirt and impurities, if any.

3.   In a Serving glass, add 3-4 tablespoon of jelly made from Katira. Add the rose syrup over it. Add chilled milk, and mix it thoroughly. You may add water if needed.

4.   Add sugar as per taste.

5.   Add few Ice Cubes

6.   Decorate it with chopped Almonds and Dry fruits on it.

7. A delicious, and never ending love with Gond katira Sharbat is on the way. Enjoy it, and beat the summer Heat.

8.   It is good for your stomach, and full of proteins and other nutrition.

9.   You can keep the left- over Katira Jelly in fridge for future use.

Saturday, 23 February 2019

गोरखमुंडी परिचय एवं प्रयोग

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GORAKHMUNDI 


आयुर्वेद मे गोरखमुंडी को रसायन कहा गया है...... आयुर्वेद के अनुसार रसायन का अर्थ है वह औषधि जो शरीर को जवान बनाए रखे........ गोरखमुण्डी भारत के प्रायः सभी प्रान्तों में पाई जाती है....... संस्कृत में इसे श्रावणी महामुण्डी अरुणा,तपस्विनी तथा नीलकदम्बिका आदि कई नामो से जानी जाती है.....यह एक अत्यन्त लाभकारी औषधि है..।
भारतीय वनौषधियों में गोरखमुंडी का विशेष महत्‍व है..... सर्दी के मौसम में इसमें फूल और फल लगते हैं...... इस पौधे की जड़, फूल और पत्‍ते कई रोगों के लिए फायदेमंद होते हैं.....।
गोरखमुंडी के चार ताजे फल तोड़कर भली प्रकार चबायें और दो घूंट पानी के साथ इसे पेट में उतार लें तो एक वर्ष तक न तो आंख आएगी और न ही आंखों की रोशनी कमजोर होगी.....गोरखमुंडी की गंध बहुत तीखी होती है......आंखों की रोशनी , नारू रोग (इसे बाला रोग भी कहते हैं, यह रोग गंदा पानी पीने से होता है),वात रोग (आम वात की पीड़ा) , कुष्‍ठ रोग , धातु रोग , योनि में दर्द हो, फोड़े-फुन्सी या खुजली और पीलिया इन सभी रोगों में इसका उपयोग अत्यंत लाभकारी है.....गर्भाशय, योनि सम्बन्धी अन्य बीमारियों पथरी-पित्त सिर की आधाशीशी आदि में भी यह अत्यन्त लाभकारी औषधि है ....।

गोरखमुंडी,बारसावड़ी,बोड़ थरा,श्रावणी, मुंडी या गुड़रिया (East Indian glob thistle या Sphaeranthus Indicus ) भूमि की उर्वरता का परिचायक बिशिष्ट गंध वाला क्षुप है क्योंकि माना जाता है जहाँ यह पनपा वह भूमि उर्वर है । बचपन में इसके गोलाकार पुष्प मुंडक को तोड़कर खेला करते थे ।
गोरखमुंडी यूरिक एसिड की सर्वोत्तम आयुर्वेद औषधि है और कई दवा कंपनियां इसके पावडर और कैप्सूल महंगे दामों पर बेचते हैं ।
गंडई सालेवाड़ा के आदिवासी चेहरे की झुर्रियां हटाने इसकीं पत्तियों का लेप लगाते है,हालांकि कुछ लोगों को इससे स्किन एलर्जी हो सकती है ।छग में इसे Eosinophilia के उपचार में कारगर माना जाता है ।
सिफलिस में पौधे का पावडर तथा खुजली एवं अन्य त्वचा रोगों में पत्त्तों का लेप पानी के साथ लगाते हैं ।इसे सिरके के साथ पीसकर दांतों पर मलने से मुख दुर्गंध दूर होती है और achromatopsia में इसका जूस पीना लाभदायक होता है ।केश विकारों में काले भांगरे या भृंगराज के चूर्ण के साथ शहद में मिलाकर इसका चूर्ण लेते है ।जड़ों का आधा चम्मच रस प्रतिदिन लेने से पेट के कृमि बाहर आ जाते हैं ।1 गिलास दूध में 1 चम्मच जड़ का चूर्ण का प्रतिदिन दो बार सेवन piles और heavy mensyrual bleeding में लाभ पहुंचाता है । rheumatism में अदरक के साथ जड़ को समभाग पीसकर कुनकुने पानी में 2 बूँद रोज पीने से लाभ पहुंचता है ।
मुंडी के चूर्ण का सेवन testosterone का स्त्राव बढ़ाकर कामेच्छा को बढ़ाता है और इसकीं ताजी जड़ को तिल के तेल में उबालकर उसकी मालिश erectile disfunction को ठीक करती है । इसके बीजों को पीसकर शक्कर के साथ सेवन यौवन वर्धक माना जाता है ।बीज का चूर्ण gastrointestinal disorder को भी दूर करता है ।

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Thursday, 14 February 2019

लिसोड़ा : परिचय और औषधीय गुण

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#लिसोड़ा     #लसोड़ा       #गुन्दी 

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अभी गुंदी पर फूलो की बहार हैं...गुंदी के पेड़ अब कम ही दिखते हैं...इसके पेड़ मध्यभारत के वनों में अधिकांश देखे जा सकते है, यह एक विशाल पेड़ होता है जिसके पत्ते चिकने होते है, बचपन में अक्सर इसके पत्तों को पान की तरह चबाते थे....इसकी लकड़ी इमारती उपयोग होता है...इसके बड़े पेड़ के तने अधिकांश खोखले दिखाई पड़ते हैं,जिनका मुख्य कारण इसके गोंद के कारण पनपने वाले कीट होते हैं...।
इसे रेठु,लसोड़ा,गोंदी,निसोरा, गोधरी, भेनकर, शेलवेट आदि कहते हैं, हालांकि इसका वानस्पतिक नाम #कार्डिया_डाईकोटोमा है.......।
इसके कच्चे फलों की सब्जी और अचार भी बनाया जाता है...इसके फूलों (मोड़) की स्वादिष्ट सब्जी बनती है...इसके पके फल बड़े मीठे और बहुत चिकने लगते है...इसके फल से गोंद जैसा चिकनाहट निकलती है शायद इसी कारण इसे गुन्दा कहा जाता है...।

#औषधीय_गुण     https://indianjadibooti.com/Jadistore/Lisodha
गुन्दी की छाल को पानी में घिसकर प्राप्त रस को अतिसार से पीड़ित व्यक्ति को पिलाया जाए तो आराम मिलता है....इसी रस को अधिक मात्रा में लेकर इसे उबाला जाए और काढ़ा बनाकर पिया जाए तो गले की तमाम समस्याएं खत्म हो जाती है.... इसके बीजों को पीसकर दाद-खाज और खुजली वाले अंगों पर लगाया जाए आराम मिलता है।
इसकी छाल की लगभग 200 ग्राम मात्रा लेकर इतने ही मात्रा पानी के साथ उबाला जाए और जब यह एक चौथाई शेष रहे तो इससे कुल्ला करने से मसूड़ों की सूजन, दांतो का दर्द और मुंह के छालों में आराम मिल जाता है।



पंजाब मे इस की मुख्य रूप से दो प्रजातिया मिलती है । इन्हे लासोडा ओर लासोडी कहा जाता है। लासोडा का वृक्ष बडे आकार मे होता है इस के फलो का आकार बडा होता है । जबकि लासोडी का वृक्ष ओर फल दोनो ही छोटे होते है । लासोडा का आचार डाला जाता है । इन के पके फल पेट के सभी रोगो के लिए रामबाण माने जाते है । इन का उपयोग अनेक युन्नानी ओषधियो के बनाने मे होता है । अब इन के वृक्ष कम नजर आते है ।
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