Sunday, 3 June 2018

वंशलोचन (Banslochan, Tabasheer, Tabashir)

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वंशलोचन शरीर की धातुओं को बढ़ाता है और वीर्य की मात्रा में वृद्धि करता है। यह धातु को पुष्ट करता है। यह स्वादिष्ट और ठंडा होता है, प्यास को रोकता है। यह खांसीबलगमबुखार, पित्त, खून की खराबी और सफेद दाग को दूर करता है। यह फोड़ा-फुन्सियों और पाण्डु (पीलिया) रोगों को दूर करता है। यह हृदय और आमाशय को बलवान बनाता है। प्यास को रोकता है तथा पित्त से होने वाले खूनी दस्तों को दूर करता है। यह उन्माद (पागलपन) और गर्मी के बुखार में लाभ देता है। 10 ग्राम वंशलोचन, 10 ग्राम भूनी हुई फिटकरी और 10 ग्राम पिसी हुई मिश्री का चूर्ण बनाकर खांसी के लिए बहुत ही लाभदायक होता है। यह छोटे-छोटे बच्चों की खांसी जो कफ को थूक नहीं सकते हैं तथा खांसते-खांसते बेहोश हो जाते हैं। उनके लिए यह चूर्ण बहुत ही लाभकारी होता है। इसे बच्चों को आयु के अनुसार आधा ग्राम तक दे सकते हैं।


विभिन्न रोगों मे सहायक :

1. दमा : 20 ग्राम पीपल और 20 ग्राम वंशलोचन  को पीसकर 2 ग्राम की मात्रा में शहद में मिलाकर सुबह-शाम देने से दमा का रोग दूर हो जाता है।

2. दांत निकलना : दांत निकलते समय बच्चे को वंशलोचन और शहद मिलाकर चटाने से दांत सुन्दर निकलते हैं और दांतों का दर्द भी खत्म हो जाता है।

3. खांसी  :
  • वंशलोचन एक ऐसा द्रव्य है जो अनेक योगों में प्रयुक्त होता है। बहुत सी प्रसिद्ध औषधियां इसके योग से बनती हैं। खांसी और सांस के रोग में इससे ज्यादा लाभ उठाया जा सकता है। खांसी अगर सूखी हो तो आधा ग्राम वंशलोचन शहद के साथ मिलाकर चाटने से दूर हो जाती है। सांस के रोग में भी वंशलोचन बहुत लाभकारी होता है। आधे ग्राम तक वंशलोचन के चूर्ण में 1 चुटकी पीपल का चूर्ण मिलाकर शहद के साथ देने से पूरा लाभ मिलता है।
  • 1 से ढाई ग्राम वंशलोचन के चूर्ण को शहद के साथ मिलाकर खाने से सूखी खांसी ठीक हो जाती है।
4. गर्भ की रक्षा : आधा ग्राम वंशलोचन पानी या दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से गर्भपात नहीं होगा और गर्भशक्तिशाली बनता है। इससे गर्भवती स्त्री और बच्चे का स्वास्थ्य ठीक रहता है।

5. मुंह के छाले :
  • मुंह के छाले में वंशलोचन के साथ शहद मिलाकर लगाने से मुंह के छालों में आराम रहता है।
  • हल्दी व वंशलोचन को एक साथ पीसकर मुंह के छाले पर लगाने से छाले ठीक हो जाते हैं।
6. स्त्रियों का प्रदर रोग :
  • 50 ग्राम वंशलोचन को पीसकर 50 ग्राम चीनी में मिलाकर इसे 5-5 ग्राम कच्चे दूध और पानी से सुबह-शाम सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।
  • 50-50 ग्राम की मात्रा में वंशलोचन, नागकेसर, छोटी इलायची को लेकर पीस लें। इसमें 100 ग्राम की मात्रा में मिश्री मिला लें। इसमें से 1-1 चम्मच सुबह-शाम दूध के साथ सेवन करने से प्रदर रोग में लाभ होता है।
7. यकृत का बढ़ना :
  • 1.5 ग्राम वंशलोचन को शहद के साथ मिलाकर रोगी को चटाकर खिलाने से यकृत (जिगर) वृद्धि में बहुत लाभ होता है।
  • 120 मिलीग्राम की मात्रा में असली वंशलोचन बच्चे को सुबह-शाम दूध या शहद के साथ सेवन करने से लाभ होता हैं।
  • 120-120 मिलीग्राम वंशालोचन, पपीता और चिरायता का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से यकृत वृद्धि में बहुत फायदा होता है।
8. वीर्य रोग में :
  • 30 ग्राम वंशलोचन और 3 ग्राम छोटी इलायची को पीसकर 1-1 ग्राम सुबह-शाम घी और चीनी में मिलाकर लेने से वीर्य के रोग दूर होते हैं।
  • 60 ग्राम वंशलोचन को पीस लें। इसमें 40 ग्राम चीनी मिला लें। इसे 5-5 ग्राम सुबह-शाम दूध से लेते रहने से वीर्य रोग में लाभ होता है।

9. हाथ-पैरों की जलन : 1 ग्राम वंशलोचन को शहद के साथ सुबह-शाम चाटने से हाथ-पैरों की जलन शान्त हो जाती है।
10. बालरोग : 120 मिलीग्राम पिसा हुआ वंशलोचन शहद में मिलाकर सुबह रोगी को चटाने से खांसी ठीक हो जाती है।

Friday, 1 June 2018

मुलेठी बहुत गुणकारी औषधि है। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए फायदेमंद है।

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मुलेठी

मुलेठी बहुत गुणकारी औषधि है। मुलेठी के प्रयोग करने से न सिर्फ आमाशय के विकार बल्कि गैस्ट्रिक अल्सर के लिए फायदेमंद है। इसका पौधा 1 से 6 फुट तक होता है। यह मीठा होता है इसलिए इसे ज्येष्ठीमधु भी कहा जाता है। असली मुलेठी अंदर से पीली, रेशेदार एवं हल्की गंधवाली होती है। यह सूखने पर अम्ल जैसे स्वाद की हो जाती है। मुलेठी की जड़ को उखाड़ने के बाद दो वर्ष तक उसमें औषधीय गुण विद्यमान रहता है। ग्लिसराइजिक एसिड के होने के कारण इसका स्वाद साधारण शक्कर से पचास गुना अधिक मीठा होता है।

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मुलेठी के गुण –
– यह ठंडी प्रकृति की होती है और पित्त का शमन करती है .

– मुलेठी को काली-मिर्च के साथ खाने से कफ ढीला होता है। सूखी खांसी आने पर मुलेठी खाने से फायदा होता है। इससे खांसी तथा गले की सूजन ठीक होती है।- अगर मुंह सूख रहा हो तो मुलेठी बहुत फायदा करती है। इसमें पानी की मात्रा 50 प्रतिशत तक होती है। मुंह सूखने पर बार-बार इसे चूसें। इससे प्‍यास शांत होगी।

– गले में खराश के लिए भी मुलेठी का प्रयोग किया जाता है। मुलेठी अच्‍छे स्‍वर के लिए भी प्रयोग की जाती है।

– मुलेठी महिलाओं के लिए बहुत फायदेमंद है। मुलेठी का एक ग्राम चूर्ण नियमित सेवन करने से वे अपनी सुंदरता को लंबे समय तक बनाये रख सकती हैं।

– लगभग एक महीने तक , आधा चम्मच मूलेठी का चूर्ण सुबह शाम शहद के साथ चाटने से मासिक सम्बन्धी सभी रोग दूर होते है.

– फोड़े होने पर मुलेठी का लेप लगाने से जल्दी ठीक हो जाते है.

– रोज़ ६ ग्रा. मुलेठी चूर्ण , ३० मि.ली. दूध के साथ पिने से शरीर में ताकत आती है.

– लगभग ४ ग्रा. मुलेठी का चूर्ण घी या शहद के साथ लेने से ह्रदय रोगों में लाभ होता है.

– इसके आधा ग्राम रोजाना सेवन से खून में वृद्धि होती है.

– जलने पर मुलेठी और चन्दन के लेप से शीतलता मिलती है.

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– इसके चूर्ण को मुंह के छालों पर लगाने से आराम मिलता है.

– मुलेठी का टुकड़ा मुंह में रखने से कान का दर्द और सूजन ठीक होता है.


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– उलटी होने पर मुलेठी का टुकडा मुंह में रखने पर लाभ होता है.

– मुलेठी की जड़ पेट के घावों को समाप्‍त करती है, इससे पेट के घाव जल्‍दी भर जाते हैं। पेट के घाव होने पर मुलेठी की जड़ का चूर्ण इस्‍तेमाल करना चाहिए।

– मुलेठी पेट के अल्‍सर के लिए फायदेमंद है। इससे न केवल गैस्ट्रिक अल्सर वरन छोटी आंत के प्रारम्भिक भाग ड्यूओडनल अल्सर में भी पूरी तरह से फायदा करती है। जब मुलेठी का चूर्ण ड्यूओडनल अल्सर के अपच, हाइपर एसिडिटी आदि पर लाभदायक प्रभाव डालता है। साथ ही अल्सर के घावों को भी तेजी से भरता है।

– खून की उल्टियां होने पर दूध के साथ मुलेठी का चूर्ण लेने से फायदा होता है। खूनी उल्‍टी होने पर मधु के साथ भी इसे लिया जा सकता है।

– हिचकी होने पर मुलेठी के चूर्ण को शहद में मिलाकर नाक में टपकाने तथा पांच ग्राम चूर्ण को पानी के साथ खिला देने से लाभ होता है।

– मुलेठी आंतों की टीबी के लिए भी फायदेमंद है।
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– ये एक प्रकार की एंटीबायोटिक भी है इसमें बैक्टिरिया से लड़ने की क्षमता पाई जाती है। यह शरीर के अन्‍दरूनी चोटो में भी लाभदायक होती है।

– मुलेठी के चूर्ण से आँखों की शक्ति भी बढ़ती है सुबह तीन या चार ग्राम खाना चाहिये।

– यदि भूख न लगती हो तो एक छोटा टुकड़ा मुलेठी कुछ देर चूसे, दिन में ३,४ बार इस प्रक्रिया को दोहरा ले ,भूख खुल जाएगी 

– कोई भी समस्या न हो तो भी कभी-कभी मुलेठी का सेवन कर लेना चाहिए आँतों के अल्सर ,कैंसर का खतरा कम हो जाता है तथा पाचनक्रिया भी एकदम ठीक रहती है .

पुनर्नवा का चूर्ण (एक ऐसी औषधि जो करती है बहुत सारे रोगों से लड़ने में मदद)

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इस पोस्ट में हम आपके लिए एक ऐसे पौधे के चूर्ण के बारे में जानकारी लेकर आये हैं जिसके सेवन से शरीर में बहुत सारे रोग दम तोड़ देते हैं। यह कैंसर के साथ साथ जल्दी बुढ़ापे को भी नहीं आने देता है। इस पौधे का नाम है पुनर्नवा। पुनर्नवा का अभिप्राय है यह है कि जो रसायन व रक्तवर्धक होने से शरीर को फिर से नया जैसा बना दे, उसे पुनर्ववा कहते हैं। 

पुनर्नवा का चूर्ण भी एक ऐसी औषधि है जो बहुत सारे रोगों से लड़ने में मदद करती है। पुनर्नवा स्वाद में कड़वा, तीखा, कसैला और खारा होता है। यह वायु, कफ, सूजन, ख़ासी, बवासीर, पांडुरोग का नाश करता है।केवल रोग निवारक औषधि ही नहीं है यह शक्तिदायक औषधि भी है।
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आइये जानते हैं पुनर्नवा के औषधीय फायदों के बारे में:-


1.पीलिया रोग में:-

पीलिया के रोग में आँखे तथा शरीर की त्वचा का रंग बदल कर पीला हो जाता है, मूत्र में पीलापन, ज्वर तथा कमज़ोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। पीलिया से पीड़ित लोगों के लिए पुनर्नवा बहुत कारगर होता है। इसका 2 चम्मच रस सुबह-शाम भोजन के बाद शहद से रोजाना सेवन करने से और पुनर्नवा की जड़ के 108 टुकड़ों से बनी माला को गले में धारण करने से पीलिया के रोग में लाभ होता है। इसके अलावा पुनर्नवा के पंचांग (जड़, तना, पत्ती, फल और फूल) के 10-20 मिलीलीटर रस में हरड़ का 2-4 ग्राम चूर्ण मिलाकर पीने से पीलिया रोग कम हो जाता है।

2.खून की कमी दूर करे:-

पुनर्नवा का चूर्ण एनीमिया से पीड़ित लोगों के लिए बहुत कारगर होता है। पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण, मुनक्का और हल्दी को बराबर मात्रा में पीसकर 1 चम्मच की मात्रा में रोजाना सुबह-शाम 1 कप दूध के साथ सेवन करने से खून की कमी के रोग में लाभ होता है।

3. हृदय रोग में:-

हृदय रोगियों के लिए पुनर्नवा का चूर्ण बहुत लाभदायक होता है। पुनर्नवा की जड़ का चूर्ण और सूखे पत्तों के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर 1 चम्मच की खुराक में रोजाना सुबह-शाम शहद के साथ सेवन करें। इससे दिल के अनेक रोगों में लाभ होता है।

4.हमेशा जवां बनाये रखे:-

आयुर्वेद के अनुसार इस पौधे में यह क्षमता है कि इसके सेवन से व्यक्ति अपने आप को पुनः जवान बना सकता है।कहते हैं इसे सेवन से बुढ़ापे में भी मनुष्य को जवान जैसी एनर्जी लगती है। पुनर्नवा की ताजी जड़ का रस 2 चम्मच एवं पुनर्नवा चूर्ण को मुनक्के के साथ 2-3 माह तक नियमित सेवन करने से वृद्ध व्यक्ति भी युवा की तरह महसूस करता है। इसके अलावा पुनर्नवा को रोजाना 1 चम्मच खाने के साथ या फिर सब्जी में मिलाकर खाने से बुढ़ापा नहीं आता यानी कि बूढ़ा व्यक्ति भी जवां बना रहता है क्योंकि इससे शरीर के सभी अंगों में नई कोशिकाओं का निर्माण होता रहता है। 20 ग्राम पुनर्नवा को रोजाना दूध के साथ 6 महीने तक लगातार पीने से भी मनुष्य की उम्र बढ़ती है।

5.किडनी की पथरी को खत्म करे:-

पुनर्नवा का सेवन किडनी को साफ करने के साथ साथ किडनी में पथरी की समस्या को भी खत्म करता है। किडनी में पथरी होने पर पुनर्नवा के पौधे का काढ़ा बनाए और रोजाना इसे पियें।

6.खून को साफ करे:-

पुनर्नवा रक्तशोधन में उपयोग किया जाता है। यह रक्त से विषैले पदार्थों को दूर कर कई रोगों को नष्ट कर देता है।

7.जोड़ों के दर्द में:-

पुनर्नवा का उपयोग जोड़ों के दर्द से निजात दिलाता है। यह किसी भी तरह के आर्थराइटिस में उपयोगी साबित होता है। 1 ग्राम पुनर्नवा की जड़ के पाउडर को अदरक और कपूर के साथ मिला कर काढ़ा बना कर 7 दिनों के लिए उपयोग करें। इससे जोड़ों के दर्द में आराम मिलेगा।

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8.कमजोरी दूर करे:-

पुनर्नवा शरीर को ऊर्जा देता है। यह मांसपेशियों को मज़बूत कर कमज़ोरी और दुबलापन दूर करता है।

9.पाचन तंत्र को ठीक रखे:-

पुनर्नवा पेट से जुडी बीमारियों को दूर करता है। आँतों में ऐठन, अपच और पेट में ज़रूरी अम्लों की कमी जैसे रोगों में यह जल्द आराम दिलाता है।

10.त्वचा रोगों के लिए:-

किसी भी प्रकार के त्वचा संबंधी रोगों के लिए भी पुनर्नवा काफी फायदेमंद होता है। इसके जड़ को तेल के साथ गर्म करके मालिश करें। चर्म रोग जैसे दाग, धब्बे, छाई , चोट के निशान आदि पर पुनर्नवा के जड़ को पीस कर लेप बनाकर लगाएं। कुछ ही दिनों में आप रोग को दूर होता पाएंगे।

11.कैंसर होने से बचाए:-

ये कैन्सर के मरीज़ों के लिए आयुर्वेद जगत की सबसे अद्भुत औषधि है क्यूँकि ये नयी कोशिकाएँ बनाती है। ये नयी कोशिकाएँ कैन्सर से लड़ने में शक्ति प्रदान करती है।

12.आखों के रोग:-

पुनर्नवा की जड़ को गुलाबजल में घिसकर रोजाना सोते समय आंखों में लगाने से आंखों के अनेक रोग दूर होकर नज़र में सुधार होता है। पुनर्नवा के पत्तों का रस 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार शहद के साथ आंखों के रोगों में प्रयोग कर सकते हैं। इसके अलावा पुनर्नवा की जड़ों को पीसकर शहद में मिलाकर काजल की तरह लगाने से आंख की लाली ठीक हो जाती है।

नहीं बनेगी पत्थरी (स्टोन) अगर खाएंगे कुल्थी


नहीं बनेगी पत्थरी (स्टोन) अगर खाएंगे कुल्थी।

कई लोगो को अक्सर ही (पत्थरी) स्टोन की समस्या आम ही रहती हैं। बार बार ऑपरेशन करवाने के बाद भी उनको ये समस्या दोबारा हो जाती हैं। ऐसा इसलिए होता हैं क्युकी उनका शरीर भोजन द्वारा ग्रहण किये हुए कैल्शियम को पचा नहीं पाता। और किडनी भी शरीर की गंदगी की सफाई करते समय इसको साफ़ करने में असक्षम हो जाती हैं और यही से ये हमारे मूत्राशय को भी प्रभावित करती हैं।

कुल्थी – प्राकृतिक पत्थरी नाशक।
गुर्दे से जुड़ी कई समस्याएं हैं, मसलन गुर्दे में दर्द, मूत्र में जलन या मूत्र का अधिक या कम आना आदि।
इन्हीं समस्याओं में से एक समस्या, जिसके पीडि़तों की संख्या लगातार बढ़ रही है, वह है किडनी में पथरी।
आयुर्वेद व घरेलू चिकित्सा में किडनी की पथरी में कुलथी को फायदेमंद माना गया है। गुणों की दृष्टि से कुल्थी पथरी एवं शर्करानाशक है। वात एवं कफ का शमन करती है और शरीर में उसका संचय रोकती है। कुल्थी में पथरी का भेदन तथा मूत्रल दोनों गुण होने से यह पथरी बनने की प्रवृत्ति और पुनरावृत्ति रोकती है। इसके अतिरिक्त यह यकृत व पलीहा के दोष में लाभदायक है। मोटापा भी दूर होता है।
250 ग्राम कुल्थी कंकड़-पत्थर निकाल कर साफ कर लें। रात में तीन लिटर पानी में भिगो दें। सवेरे भीगी हुई कुल्थी उसी पानी सहित धीमी आग पर चार घंटे पकाएं।
जब एक लिटर पानी रह जाए (जो काले चनों के सूप की तरह होता है) तब नीचे उतार लें। फिर तीस ग्राम से पचास ग्राम (पाचन शक्ति के अनुसार) देशी घी का उसमें छोंक लगाएं। छोंक में थोड़ा-सा सेंधा नमक, काली मिर्च, जीरा, हल्दी डाल सकते हैं। पथरीनाशक औषधि तैयार है।
आप दिन में कम-से-कम एक बार दोपहर के भोजन के स्थान पर यह सारा सूप पी जाएं। 250 ग्राम पानी अवश्य पिएं।
एक-दो सप्ताह में गुर्दे तथा मूत्राशय की पथरी गल कर बिना ऑपरेशन के बाहर आ जाती है, लगातार सेवन करते रहना राहत देता है।
यदि भोजन के बिना कोई व्यक्ति रह न सके तो सूप के साथ एकाध रोटी लेने में कोई हानि नहीं है।

Best Quality Kulthi Dal

गुर्दे में सूजन की स्थिति में जितना पानी पी सकें, पीने से दस दिन में गुर्दे का प्रदाह ठीक होता है।
यह कमर-दर्द की भी रामबाण दवा है। कुल्थी की दाल साधारण दालों की तरह पका कर रोटी के साथ प्रतिदिन खाने से भी पथरी पेशाब के रास्ते टुकड़े-टुकड़े होकर निकल जाती है। यह दाल मज्जा (हड्डियों के अंदर की चिकनाई) बढ़ाने वाली है।
कुल्थी का पानी भी लाभदायक
कुल्थी का पानी विधिवत लेने से गुर्दे और मूत्रशय की पथरी निकल जाती है और नयी पथरी बनना भी रुक जाता है। किसी साफ सूखे, मुलायम कपड़े से कुल्थी के दानों को साफ कर लें। किसी पॉलीथिन की थैली में डाल कर किसी टिन में या कांच के मर्तबान में सुरक्षित रख लें।
कुल्थी का पानी बनाने की विधि:
किसी कांच के गिलास में 250 ग्राम पानी में 20 ग्राम कुल्थी डाल कर ढक कर रात भर भीगने दें। प्रात: इस पानी को अच्छी तरह मिला कर खाली पेट पी लें। फिर उतना ही नया पानी उसी कुल्थी के गिलास में और डाल दें, जिसे दोपहर में पी लें। दोपहर में कुल्थी का पानी पीने के बाद पुन: उतना ही नया पानी शाम को पीने के लिए डाल दें।

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15 दिन में रुका किसी का डायलिसिस तो किसी का हुआ क्रिएटिनिन नार्मल किसी का टला ट्रांसप्लांट
इस प्रकार रात में भिगोई गई कुल्थी का पानी अगले दिन तीन बार सुबह, दोपहर, शाम पीने के बाद उन कुल्थी के दानों को फेंक दें और अगले दिन यही प्रक्रिया अपनाएं। महीने भर इस तरह पानी पीने से गुर्दे और मूत्राशय की पथरी धीरे-धीरे गल कर निकल जाती है।
इसके साथ ये सहायक उपचार भी करे।

कुल्थी का कुछ समय तक नियमित सेवन करने से पथरी टूट-टूट कर बाहर निकल जाती है। यह मूत्रमार्ग में पथरी, मूत्र में क्रिस्टल आना, मूत्र में जलन आदि में दी जाती है।https://indianjadibooti.com

मालकांगनी के फायदे


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आयुर्वेदिक मतानुसार मालकांगनी रस में कटु, तिक्त, गुण में तीक्ष्ण, स्निग्ध, प्रकृति में गर्म, विपाक में कटु, कफ़ और वात नाशक, वमनकारक, अग्निवर्द्धक, बुद्धि और स्मरणशक्तिवर्द्धक होती है। यह पक्षाघात, संधिवात, बेरी-बेरी, कास-श्वास, मूत्र रोग, खुजली, अर्श, नपुंसकता, दाद, व्रण, सफेद दाग, शोथ, स्मृति की कमी में गुणकारी है। यह अफीम खाने की आदत छुड़ाने की एक उत्तम औषधि है।
मालकांगनी के विभिन्न रोगों में प्रयोग और घरेलु उपचार
1. सफेद दाग होने पर मालकांगनी का प्रयोग
2. अफीम की आदत छुड़ाने के लिए मालकांगनी का का सेवन
3. दाद पर लगाये मालकांगनी
4. खूनी बवासीर में मालकांगनी का इस्तेमाल
5. खुजली में लगाये मालकांगनी
6. बेरी-बेरी रोग में मालकांगनी का सेवन
7. दमा, श्वास के रोग में मालकांगनी का सेवन

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8. नपुंसकता में मालकांगनी का सेवन
9. बुद्धि और स्मृति बढ़ाने के लिए मालकांगनी का सेवन करे
10. अनिद्रा में मालकांगनी का सेवन
11. नेत्र ज्योति बढ़ाने के लिए मालकांगनी का प्रयोग
12. दुर्बलता में में लीजिये मालकांगनी
13. सिर दर्द में मालकांगनी का सेवन

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Thursday, 31 May 2018

KAUNCH BEEJ(Mucuna Pruruiens) - Increase the testosterone in Infertile men




KAUNCH BEEJ(Mucuna Pruruiens)

The plant M. pruriens, widely known as “velvet bean,” is a vigorous annual climbing legume originally from southern China and eastern India, where it was at one time widely cultivated as a green vegetable crop . is an established herbal drug used for the management of male infertility, nervous disorders, and also as an aphrodisiac. It has been shown that its seeds are potentially of substantial medicinal importance. The ancient Indian medical system, Ayurveda, traditionally used M. pruriens, even to treat Parkinson's disease

☛Increase in seminal quality & motility.
☛The decrease in adrenaline seen in infertility is normalized with mucuna
☛In chronically stressed men, prolonged ingestion of mucuna pruriens appears to be able to reduce cortisol concentrations
☛Mucuna contains L-DOPA .The reduction in dopamine & noradrenaline levels seen in infertility seems to be reversed with L-DOPA ingestion; 
☛An increase in testosterone is seen in infertile men.

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Ashwagandha - Enhances sexual potency for both men and women




Ashwagandha, one of the most powerful herbs in Ayurvedic healing, has been used since ancient times for a wide variety of conditions, and is most well-known for its restorative benefits.The biologically active chemical constituents of Withania somnifera include alkaloids (isopelletierine, anaferine, cuseohygrine, anahygrine, etc.), steroidal lactones (withanolides, withaferins) and saponins ,Sitoindosides and acylsterylglucosides in Ashwagandha are anti-stress agents.As per the study Ashwagandha is known to have positive effects on body energy levels & mitochondrial health.

☛ Protects the immune system
☛ Helps combat the effects of stress
☛ Reduces anxiety and depression 
☛ Helps in reducing brain-cell degeneration
☛ Stabilizes blood sugar
☛ Helps lower cholesterol
☛ Acts as anti-inflammatory agent
☛ Enhances sexual potency for both men and women.

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Safed Musli - A Miraculous Herb for Sexual Health and Vitality | Indianjadibooti.com





It would not be an exaggeration to call Safed Musli a unique gift of nature to mankind since the time immemorial.

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In the Ayurvedic literature, Safed Musli is celebrated as a Divya Aushad with unparalleled medicinal properties. It is a chief ingredient in the preparation of over a hundred Ayurvedic formulations. Safed Musli is also gaining increasing acceptance as a Vitalizer and health-giving tonic, a curative for pre-natal and post-natal problems, a restorative for immunity-improvement and as a remedy for diabetes and arthritis. 
Safed Musli have rich source vitamins and about more than 25 alkaloids, beside this it have proteins, steroids, polysaccharides and carbohydrates. Today Safed Musli is in demand not only in India but throughout the world. Due to its vigorous properties it is also known as such as “Indian Viagra”, “Golden Roots”, “Herbal Viagra”, “The Wonder Harvest” etc.
The recent discovery of Safed Musli as a natural and safe aphrodisiac agent has also opened up new channels of application and new demand for it. By virtue of being a herb, Safed Musli has been found to be an ideal aphrodisiac with no negative side-effects associated with chemical-based aphrodisiac.

Use of Safed Musli:
A number of Health tonics (Sexual tonics) are prepared from Safed Musli. It is essential part of a traditional diet of mothers (after delivery) in the form of Laddoos. Efforts in countries like USA and England are also on to convert it into chips to use it as a nutritious breakfast. On the other hand, Safed Musli is a safe and effective drug, with similar benefits and without any side-effects.
Safed Musli is a traditional medicinal plant. Its tubers roots are used in ayurvedic medicines. Roots are used for the preparation of nutritive tonic used in general sexual weakness. There is a vast demand of Safed Musli all over the world.
Indication:
Used for Sexual weakness, low libido, low sperm count etc. It is also found to be effective as a energetic one in cases of cough and asthma. 

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#Moringa seeds (सहजन के बीज और गोंद)

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#Moringa seeds are produced annually in the tropical and sub tropical countries of Asia and Africa. Like the rest of the plant, they are highly valued, as they give us the incredibly nutritious Moringa Tree. The Moringa oleifera tree, also known as the Tree of Life, has a host of nutritive uses for both people and livestock alike.

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#Moringa_oleifera seeds have a unique and pleasing appearance. They come with their very own wings to ensure the wind carries them to fertile ground far away from the parent plant. When firmly rooted, they produce a bountiful crop of one of the world’s most healthy plants.

1. Lowers Blood Pressure

High blood pressure is a serious cardiovascular issue that can lead to heart attacks and stroke if it isn’t managed. Medications are sometimes necessary, but the ideal route if possible is through exercise, a healthy lifestyle and diet, and proper supplementation. While studies have shown that moringa can lower blood pressure, these studies are preliminary and more research needs to be done on humans, so talk to your doctor before stopping any prescribed treatment for high blood pressure.

2. Acts as a Sleep Aid

For a good night’s rest, steep moringa leaves in hot water for 15 minutes and then drink before bed. It will help you sleep soundly, which in turn will leave you energized to tackle the day.


3. Boosts Energy

A single serving of moringa has almost three times the amount of iron as spinach. This is especially important for vegetarians/vegans and those who suffer from low iron issues, as the body needs iron to enrich the blood and carry oxygen to our muscles, organs, and tissues.

4. Lowers Blood Sugar Levels

A 2014 study published in Acta Histochemica reported that moringa seeds can lower blood sugar levels, which would provide therapeutic management (or even prevention) of diabetes . However, the study was done on lab rats and research is needed on humans before any recommendations can be made.

5. High in Fiber

Moringa is high in fiber, and as a result, it can do a great job of moving food along your digestive system. Fiber is also a key component in maintaining a healthy cardiovascular system.

6. Can Lower Cholesterol

Too much cholesterol in the blood has been linked to heart disease. In traditional Thai medicine, moringa is used as a cardiotonic (a drug or herb used to improve how the heart contracts). Some plants have been known to reverse bad cholesterol and research is showing that moringa is among them.

7. Promotes Healthy, Beautiful Skin

The oil extracted from the seeds contains almost 30 antioxidants. The skin absorbs the oil well and can receive these nourishing antioxidants easily. The oil can be used as a moisturizer and antiseptic.

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#karnataka #Bangalore #Maharastra

Wednesday, 30 May 2018

गोंद के औषधीय गुण


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गोंद के औषधीय गुण:-

किसी पेड़ के तने को चीरा लगाने पर उसमे से जो स्त्राव निकलता है वह सूखने कडा हो जाता है उसे गोंद कहते है .यह शीतल और पौष्टिक होता है . उसमे उस पेड़ के ही औषधीय गुण भी होते है .

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छुआरे का गोंद :- बहुत कम लोग छुआरे के गोंद के बारे में जानते हैं, यह खजूर और छुआरे से कई गुना ज्यादा शक्तिवर्धक होता है, सर्दियों के मौसम में इसे दूध के साथ सेवन करने से शरीर पुष्ट होता है और निरोगी रहता हैं , इसके सेवन से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और शरीर वज्र के समान मजबूत हो जाता है, इसका सेवन करने से कई गंभीर बिमारियों से बचा जा सकता है
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- कीकर या बबूल का गोंद पौष्टिक होता है .
- नीम का गोंद रक्त की गति बढ़ाने वाला, स्फूर्तिदायक पदार्थ है।इसे ईस्ट इंडिया गम भी कहते है . इसमें भी नीम के औषधीय गुण होते है
पलाश के गोंद से हड्डियां मज़बूत होती है .पलाश का 1 से 3 ग्राम गोंद मिश्रीयुक्त दूध अथवा आँवले के रस के साथ लेने से बल एवं वीर्य की वृद्धि होती है तथा अस्थियाँ मजबूत बनती हैं और शरीर पुष्ट होता है।

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आम की गोंद स्तंभक एवं रक्त प्रसादक है। इस गोंद को गरम करके फोड़ों पर लगाने से पीब पककर बह जाती है और आसानी से भर जाता है। आम की गोंद को नीबू के रस में मिलाकर चर्म रोग पर लेप किया जाता है।

- सेमल का गोंद मोचरस कहलाता है, यह पित्त का शमन करता है।अतिसार में मोचरस चूर्ण एक से तीन ग्राम को दही के साथ प्रयोग करते हैं। श्वेतप्रदर में इसका चूर्ण समान भाग चीनी मिलाकर प्रयोग करना लाभकारी होता है। दंत मंजन में मोचरस का प्रयोग किया जाता है।

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- बारिश के मौसम के बाद कबीट के पेड़ से गोंद निकलती है जो गुणवत्ता में बबूल की गोंद के समकक्ष होती है।

- हिंग भी एक गोंद है जो फेरूला कुल (अम्बेलीफेरी, दूसरा नाम एपिएसी) के तीन पौधों की जड़ों से निकलने वाला यह सुगंधित गोंद रेज़िननुमा होता है । फेरूला कुल में ही गाजर भी आती है ।
- हींग दो किस्म की होती है - एक पानी में घुलनशील होती है जबकि दूसरी तेल में । किसान पौधे के आसपास की मिट्टी हटाकर उसकी मोटी गाजरनुमा जड़ के ऊपरी हिस्से में एक चीरा लगा देते हैं । इस चीरे लगे स्थान से अगले करीब तीन महीनों तक एक दूधिया रेज़िन निकलता रहता है । इस अवधि में लगभग एक किलोग्राम रेज़िन निकलता है । हवा के संपर्क में आकर यह सख्त हो जाता है कत्थई पड़ने लगता है ।यदि सिंचाई की नाली में हींग की एक थैली रख दें, तो खेतों में सब्ज़ियों की वृद्धि अच्छी होती है और वे संक्रमण मुक्त रहती है । पानी में हींग मिलाने से इल्लियों का सफाया हो जाता है और इससे पौधों की वृद्धि बढ़िया होती

- गुग्गुल एक बहुवर्षी झाड़ीनुमा वृक्ष है जिसके तने व शाखाओं से गोंद निकलता है, जो सगंध, गाढ़ा तथा अनेक वर्ण वाला होता है. यह जोड़ों के दर्द के निवारण और धुप अगरबत्ती आदि में इस्तेमाल होता है .

- प्रपोलीश- यह पौधों द्धारा श्रावित गोंद है जो मधुमक्खियॉं पौधों से इकट्ठा करती है इसका उपयोग डेन्डानसैम्बू बनाने मंच तथा पराबैंगनी किरणों से बचने के रूप में किया जाता है।

- ग्वार फली के बीज में ग्लैक्टोमेनन नामक गोंद होता है .ग्वार से प्राप्त गम का उपयोग दूध से बने पदार्थों जैसे आइसक्रीम , पनीर आदि में किया जाता है। इसके साथ ही अन्य कई व्यंजनों में भी इसका प्रयोग किया जाता है.ग्वार के बीजों से बनाया जाने वाला पेस्ट भोजन, औषधीय उपयोग के साथ ही अनेक उद्योगों में भी काम आता है।

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- इसके अलावा सहजन , बेर , पीपल , अर्जुन आदि पेड़ों के गोंद में उसके औषधीय गुण मौजूद होते है .
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Sunday, 27 May 2018

अफारा या गैस बनना (वात दोष) का सरल घरेलु उपचार

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