Saturday, 26 May 2018

जटामांसी - एक बहुपयोगी जड़ी बूटी

सभी शुद्ध शक्तिवर्धक जड़ी बूटी और उनके पाउडर हमारे पास उपलब्ध हैं , खरीदने के लिए log on करें https://indianjadibooti.com

जटामासी ~ Spikenard
हिस्टीरिया - मिरगी - वातोंमाद - Hysteria
4 चम्मच जटामांसी की जड़ का पाउडर + 2 चम्मच वच का पाउडर + एक चम्मच काला नमक मिलाकर आधा चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में तीन बार रोज लें !
इसे 1 हफ्ते तक खाने से रोग से मुक्ति मिलेगी !
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काले और लंबे बाल
जटामांसी का काढा बना बालों व जडों में रोज सुबह - सुबह लगायें ~ 2 घंटे के बाद नहा लें !
इसे रोज करने से फायदा पहुंचेगा !
त्‍वचा की चमक
जटामांसी की जड़ को गुलाबजल में पीसकर चेहरे पर लेप की तरह लगायें !
इससे कुछ दिनों में ही चेहरा खिल उठेगा !
उच्च रक्तचाप
जटामांसी - ब्राह्मी और अश्वगंधा का चूर्ण समान मात्रा में मिलाकर 1 - 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करें !
नींद न आना
सोने से 1 घंटा पहले 1 चम्मच जटामांसी की जड़ का चूर्ण पानी से ले !
इससे नींद न आने की बीमारी दूर हो जाती है !
निद्राचारित या नींद में चलना
लगभग 600 मिलीग्राम से 1200 मिलीग्राम जटामांसी का सेवन सुबह और शाम को सेवन करने से इस रोग में बहुत लाभ मिलता है !
बवासीर
जटामांसी और हल्दी बराबर की मात्रा में पीसकर मस्सों पर लगायें !
इससे बवासीर नष्ट हो जाती है !
जटामासी के तेल को मस्सों पर लगाने से मस्सें सूख जाते हैं !
सूजन व दर्द
जटामांसी का पाउडर पानी में पीसकर लेप बना सूजन पर लगाने से सूजन और दर्द नष्ट हो जाती है !
दांतों का दर्द
जटामांसी की जड़ का बारीक पाउडर बना प्रतिदिन मंजन की तरह दांतों को साफ किया जाये तो दांतों - मसूढ़ों का दर्द - सूजन 
- पीव आना - मुंह की बदबू जैसे कष्टों से मुक्ति मिल जाती है !
पेट में दर्द
जटामांसी 200 ग्राम + 200 ग्राम मिश्री + शीतलचीनी 50 ग्राम + सौंफ 50 ग्राम + सोंठ 50 ग्राम + दालचीनी 50 ग्राम इन सबका पीसकर चूर्ण बना - इसे तीन से 6 ग्राम की मात्रा में सुबह और शाम सेवन करने से पेट के दर्द में लाभ होता है !
जटामांसी - सोंठ - आंवला - काला नमक बराबर की मात्रा में मिलाकर पीस लें और एक - एक चम्मच की मात्रा में 3 बार सेवन करें !
मासिक - धर्म के विकार
जटामांसी का चूर्ण 20 ग्राम + काला जीरा 10 ग्राम और कालीमिर्च 5 ग्राम मिला चूर्ण बना - एक - एक चम्मच दिन में 3 बार कुछ दिन सेवन करें !
इससे मासिक - धर्म की पीड़ा - मानसिक तनाव - अवसाद तथा शारीरिक कष्‍ट दूर होंगे !
 कष्टपूर्ण मासिकस्राव में जटामांसी का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1800 मिलीग्राम प्रतिदिन दो - तीन बार सेवन करने से बिना कष्ट के मासिकस्राव खुलकर होने लगता है !
रजोनिवृत्ति ( मासिक - धर्म की समाप्ति ) के बाद के कष्ट
रजोनिवृत्ति के समय सभी मानसिक और शारीरिक कष्टों को मिटाने के लिए जटामांसी का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1200 मिलीग्राम प्रतिदिन तीन बार देना चाहिए !
नपुंसकता
जटामांसी + सोंठ + जायफल + लौंग - समान मात्रा में ले - पीस ~ 1 - 1 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करें ~ इससे नपुंसकता नष्ट हो जाती है !
विसर्प ( छोटी - छोटी फुसियों का दल )
600 से 1200 मिलीग्राम जटामांसी - नौसादर के साथ देने से लाभ होता है
जटामांसी की छाल का लेप करने से दर्द कम हो जाता है !
अफारा ( गैस का बनना )
जटामांसी 200 ग्राम + मिश्री 400 ग्राम + दालचीनी 50 ग्राम + शीतलचीनी 50 ग्राम + सौंफ 50 ग्राम + 50 ग्राम सोंठ को लेकर मिला - इस मिश्रण को 3 से 6 ग्राम की मात्रा में दिन में सुबह और शाम सेवन करने से पेट दर्द समाप्त हो जाता है !
मुंह के छाले
जटामांसी के टुकड़े मुंह में रखकर चूसते रहने से मुंह की जलन एवं पीड़ा कम होती है !
मुंह की दुर्गन्ध
जटामांसी - कूट - सौंफ - नरकचूर - बड़ी इलायची - सफेद जीरा और बालछड़ 10 - 10 ग्राम लेकर कूट - इसमें 70 ग्राम खाण्ड ( कच्ची चीनी ) मिला लें !
प्रतिदिन सुबह - शाम 5 - 5 ग्राम मिश्रण पानी के साथ खाने से मुंह की बदबू व मुंह में लार का आना बंद हो जाता है !
जटामांसी चबाने से मुंह की दुर्गन्ध नष्ट होती है !
रक्तपित्त
जटामांसी का चूर्ण 600 मिलीग्राम से 1200 मिलीग्राम - नौसादर के साथ सुबह - शाम खाने से रक्तपित्त और खून की उल्टी ठीक होती है !

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शरीर कांपना
हाथ - पैर कांपने पर या किसी दूसरे अंग के अपने आप हिलने पर जटामांसी का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में सुबह - शाम रोज सेवन करें !
28 से 56 मिलीग्राम जटामांसी के चूर्ण को प्रतिदिन दो तीन बार सेवन करने से शरीर का कंपन दूर हो जाता है !
उंगुलियों का कांपना
280 से 560 मिलीग्राम जटामांसी को फेंटकर प्रतिदिन दो से तीन बारी सेवन करने से लाभ मिलता है !
धनुष्टंकार ( टेटनस रोग )
शीतलचीनी 10 ग्राम + दालचीनी 10 ग्राम + सोंठ 10 ग्राम + 40 ग्राम जटामांसी तथा 80 ग्राम मिश्री को मिलाकर चूर्ण बना लें !
यह चूर्ण 3 से 9 ग्राम प्रतिदिन सुबह - शाम सेवन करने से रोगी का रोग दूर हो जाता है !
 600 से 1200 मिलीग्राम जटांमासी का चूर्ण सुबह - शाम सेवन करने से टेटनेस के रोगी के शरीर का टेढ़ापन दूर हो जाता है !
जटामांसी का काढ़ा बनाकर 280 से 560 मिलीग्राम सुबह - शाम लेने से टेटनेस का रोग ठीक हो जाता है !
फॉर हेयर - जटामांसी (Jatamansi) - नारडोस्टेयस जटामांसी - बालछड़ - स्पाइक्नाड के फायदे :-
रात में जटामांसी का एक पाव मोटा चूर्ण थोड़े से पानी में भिगो दें और सुबह मन्द आँच पर पकायें !
चार भाग शेष रहने पर छानकर उसमें 1 पाव तिल का तेल और 5 तोला जटामांसी का कल्क (चटनी) मिलाकर दोबारा पकायें - थोड़ा सा तेल रहने पर उतार लें !
इस तेल के प्रयोग से बाल झड़ना बन्द होते हैं - जूएँ शीघ्र नष्ट होती है - बाल शीघ्र बढ़ते हैं - मुलायम तथा काले रहते हैं !
परंपरागत रूप से, यह बालों को काला और चमकदार बनाने के लिए प्रयोग किया जाता है !
यह रूसी को भी नियंत्रित करता है !
चिकने - रेशमी - मोटे और स्वस्थ बालों के लिए इसका नियमित रूप से उपयोग करें !

कम उम्र में आपके बाल झड़ रहे हैं, या आपके काले बाल असमय सफ़ेद हो रहे हैं अगर आप भी अपनी इन्ही बालो की समस्याओ से चिंतित हैं तो यह तेल आपके लिए कारगर साबित हो सकता है

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ये तेल सिर्फ़ 10 दिनों में चौकाने वाले परिणाम देगा
 ये गंजो के भी बाल उगाए काले, लम्बे और घने बालों की चाहत रखने वाले इस तेल को घर पर ही तैयार करें और ज़रूर आज़माएँ,..

आज हम आपको पुरुषों और महिलाओं के बालों की तमाम समस्या से छुटकारा पाने वाला चमत्कारी उपाय बताएँगे। काले, सुंदर और चमकदार बाल नारी की सुंदरता में चार चाँद लगा देते है। पुराने समय में बालों के रख  रखाव और निखार के लिए नारिया और पुरुष अनेक तरीके इस्तेमाल में लाते थे। जिनसे वास्तव में बाल काले, घने, मजबूत और चमकदार बनते थे।  लम्बे बालों के लिए सिर्फ़ अच्छे उत्पादो का इस्तेमाल ही ज़रूरी नही है बल्कि बालों की सही देखरेख भी बहुत ज़रूरी है। इसके साथ ही उपयुक्त आहार का सेवन ना किया जाए तो भी बालो की ग्रोथ रुक जाती है। इसी तरह बालों के लिए तेल की मसाज अत्यंत फयदेमंद है। लम्बे, घने और काले बाल करने के लिए समय समय पर तेल की मसाज करे। ताकि तेल जड़ो तक जा सके। इससे आपके बालों को भरपूर पोषण मिलेगा और बाल भी लंबे होंगे।
इस तेल से महज़ 10 दिनो में आपको सकारात्मक परिणाम मिलना प्रारम्भ हो जाएँगे, हाँ लेकिन आप चाहते हो की आपकी समस्या बिलकुल से जड़ ख़त्म हो जाए तो आप इस तेल को 5-6 महीने लगातार उपयोग करे। यह तेल आप घर पर बना सकते है। आइए जाने इसको बनाने के लिए क्या क्या चाहिए और कैसे बनाया जाता है और इसका उपयोग कैसे करना है।
बालों की समस्या के 10 मुख्य कारण इस प्रकार हैं..
👉शरीर में विटामिन की कमी के आ जाने से बाल गिरने लगते हैं।
👉प्रतिदिन कास्मेटिक शैंपू से बाल धोना या साबुन से बाल धोना।
👉बालों को कलर या डाई करना।
👉हैलमेट को ज्यादा समय तक सिर पर रखना।
👉दिमाग में बेवजह की टेशन लेना।
👉बालों को झटके से खीचना या ज्यादा कस कर बालों को बांधना।
👉सिर में सफेद दाग की वजह से भी बाल गिरने लगते हैं।
👉अनुवांशिक कारण और मानसिक तनाव का होना।
👉खुशबूदार तेलों का अधिक इस्तमाल करना।
👉रक्त विकार, दाद, एग्जिमा आदि कारणों से भी बालों की समस्या होती है।
गंजापन दूर करके नए बाल लाने और झडते बाल को बंद करने का सफल इलाज है यह तैल : पुरुष और महिलाओं दोनो के लिए जिन लोगो के कम उम्र मे बाल चले गए हे, गंजापन आ गयां है, सर पर टाल पड गइ है आैर बाल बहुत कम हो रहे है तो वह लोग नीचे दियां गयां उपाय आजमांकर देखिए फायदां जरुर होगा।
आवश्यक सामग्री :
👉कलौंजी 50 Gms  https://indianjadibooti.com/Jadistore/kalonji--Kalaunji
👉आमला 50 Gms https://indianjadibooti.com/Jadistore/Awla--Amla-Dry
👉भृंगराज 40 Gms https://indianjadibooti.com/Jadistore/Bhringraj-Leaves---Bhangra
👉नागरमोथा  20 Gms  https://indianjadibooti.com/Jadistore/Nagarmotha-Powder
👉ब्राम्ही 20 Gms https://indianjadibooti.com/Jadistore/Brahmi-Booti
👉मेथीदाना 30 Gms https://indianjadibooti.com/Jadistore/Methi-Dana
👉रंताजली 30 Gms
👉अलसी 50 Gms https://indianjadibooti.com/Jadistore/Flax-Seed---Alsi
👉बदाम 30 Gms  https://indianjadibooti.com/Jadistore/Almonds
👉पानी 250 ML
👉तल्ली तैल 250 ML
👉नारीयल तैल 250 ML

(Note : ऊपर दी गयी सामग्री में उपयोग की गयी सभी बेहतरीन किस्म की जड़ी बूटी आप indianjadibooti.com से भी खरीद सकते हैं )

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👉तेल बनाने की विधि : सभी आैषधी को रात को कीसी शुद्ध तांबे के पात्र मे 250ml पानी मे भीगो दिजिए | आैर सुबह तल्ली तैल आैर नारीयल तैल के साथ अन्य औषधियों को मिक्स करके हल्की आंच पर उबाले जब तक पुरा पानी जल जाए | जब सिर्फ़ तैल की मात्रा ही बचे तब चूल्हे से उतार दिजिये आैर 2-3 दिन बाद छानकर कीसी बोटल मे भर दिजिए |
उपयोग करने का तरिका : सुबह इस तैल की मालीश नियमित रुप से करे व पांच मिनिट तक गंजापन वाले भाग आैर जहां पे बाल कम हो गए हे वहां पर मालीश करीए | यह नियमितरुप से 3 से 6 महिने तक उपयोग करना है। लेकिन आपको इसका असर महज़ 10 दिनो में देखने को मिल जाएगा।

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BABY KESAR (SAFFRON, JAFRAN, केसर) ON SALE

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Tuesday, 22 May 2018

इन आसान उपायों से नपुंसकता की समस्या को जायेंगे भूल , शीघ्र पतन की समस्या का होगा जड़ से खात्मा

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नपुंसकता,शीघ्र पतन को जड़ से मिटाएँ


मैथुन के योग्य ना रहना, नपुंसकता का मुख्य लक्षण है। थोड़े समय के लिए कामोत्तेजना होना, या थोड़े समय के लिए ही लिंगोत्थान होना, इसका दूसरा लक्षण है। मैथुन अथवा बहुमैथुन के कारण उत्पन्न ध्वजभंग नपुंसकता में शिशन पतला, टेढ़ा और छोटा भी हो जाता है। अधिक अमचूर खाने से धातु दुर्बल होकर नपुंसकता आ जाती है।
नपुंसकता के दो कारण होते हैं। शारीरिक और मानसिक। चिन्ता और तनाव से ज्यादा घिरे रहने से मानसिक रोग होता है। नपुंसकता शरीर की कमजोरी के कारण होती है। ज्यादा मेहनत करने वाले व्यक्ति को जब पौष्टिक आहार नहीं मिल पाता, तो कमजोरी बढ़ती जाती है और नपुंसकता पैदा हो सकती है। हस्तमैथुन, ज्यादा काम-वासना में लगे रहने वाले नवयुवक नपुंसक के शिकार होते हैं। ऐसे नवयुवकों की सहवास की इच्छा कम हो जाती है।
                 

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कुछ लोग शारीरिक रूप से नपुंसक नहीं होते, लेकिन कुछ प्रचलित अंधविश्वासों के चक्कर में फसकर, सेक्स के शिकार होकर मानसिक रूप से नपुंसक हो जाते हैं। मानसिक नपुंसकता के रोगी अपनी पत्नी के पास जाने से डर जाते हैं। सहवास भी नहीं कर पाते और मानसिक स्थिति बिगड़ जाती है।
*इस रोग में रोगी अपनी यह परेशानी, किसी दूसरे को नहीं बता पाता या सही उपचार नहीं करा पाता, मगर जब वह पत्नी को संभोग के दौरान पूरी सन्तुष्टि नहीं दे पाता, तो रोगी की पत्नी को पता चल ही जाता है कि वह नंपुसकता के शिकार हैं। इससे पति-पत्नी के बीच में लड़ाई-झगड़े होते हैं और कई तरह के पारिवारिक मन मुटाव हो जाते हैं। बात यहां तक भी बढ़ जाती है कि आखिरी में उन्हें अलग होना पड़ता है।
*नपुंसकता से परेशान रोगी को औषधियों खाने के साथ कुछ और बातों का ध्यान रखना चाहिए। जैसे सुबह शाम किसी पार्क में घूमना चाहिए, खुले मैदान में, किसी नदी या झील के किनारे घूमना चाहिए। सुबह सूर्य उगने से पहले घूमना ज्यादा लाभदायक है। सुबह साफ पानी और हवा शरीर में पहुंचकर शक्ति और स्फूर्ति पैदा करती है। इससे खून भी साफ होता है।
*नपुंसकता के रोगी को अपने खाने (आहार) पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। आहार में पौष्टिक खाद्य पदार्थों घी, दूध, मक्खन के साथ सलाद भी ज़रूर खाना चाहिए। फ़ल और फ़लों के रस के सेवन से शारीरिक क्षमता बढ़ती है। नपुंसकता की चिकित्सा के चलते रोगी को अश्लील वातावरण और फिल्मों से दूर रहना चाहिए, क्योंकि इसका मस्तिष्क पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है। इससे बुरे सपने भी आते हैं, जिसमें वीर्यस्खलन होता है।
*बड़ी गोखरू का फांट या घोल सुबह – शाम लेने से काम शक्ति यानी संभोग की वृद्धि दूर होती है। 250 मिलीलीटर को खुराक के रूप में सुबह और शाम सेवन करें।
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*बड़ा गोखरू और काले तिल, इन दोनों को 14 ग्राम की मात्रा में कूट – पीस लें। फिर इस को 1 किलो गाय के दूध में पकाकर खोआ बना लें। यह एक मात्रा है। इस खोयें को खाकर ऊपर से 250 मिली लीटर गाय के निकाले दूध के साथ पी लें। 40 दिन तक इसको खाने से नपुंसकता दूर हो जाती है।
https://www.amazon.in/IndianJadiBooti-Best-Quality-Til-Kala/dp/B07C63BNHG/ref=sr_1_1?s=hpc&ie=UTF8&qid=1526985355&sr=1-1&keywords=Indianjadibooti+sesame&dpID=51T%252BaJXV5YL&preST=_SX300_QL70_&dpSrc=srch

*25 ग्राम बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण, 250 मिली लीटर उबले पानी में डालकर रखें। इसमें से थोड़ा – थोड़ा बार – बार पिलाने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
*बड़ी गोखरू के फल का चूर्ण 2 ग्राम को चीनी और घी के साथ सेवन करें तथा ऊपर से मिस्री मिले दूध का सेवन करने से कामोत्तेजना बढ़ती है।
*हस्तमैथुन की बुरी लत से पैदा हुई नपुंसकता को दूर करने के लिए 1 – 1 चम्मच, गोखरू के फ़ल का चूर्ण और *काले तिल को मिलाकर शहद के साथ दिन में 3 बार नियमित रूप से कुछ हफ्तों तक सेवन करें। इससे नपुंसकता में लाभ होता है।
*गाजर का हलवा, रोज़ 100 ग्राम खाने से सेक्स की क्षमता बढ़ती है।
*कौंच के बीज के चूर्ण में तालमखाना और मिश्री का चूर्ण बराबर मात्रा में मिलाकर 3 – 3 ग्राम की मात्रा में खाने और दूध के साथ पीने से नपुंसकता (नामर्दी) ख़त्म होती है।

https://indianjadibooti.com/Jadistore/Kaunch-Seeds-White-Powder
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*कौंच के बीजों की गिरी तथा राल ताल मखाने के बीज। दोनों को 25 – 25 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर छान लें, फिर इसमें 50 ग्राम मिस्री मिला लें। इसमें 2 चम्मच चूर्ण रोज़ दूध के साथ खाने से लाभ होता है।
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Talmakhana

*गिलोय, बड़ा गोखरू और आंवला सभी बराबर मात्रा में लेकर कूट पीसकर चूर्ण बना लें। 5 ग्राम चूर्ण रोज़ मिस्री और घी के साथ खाने से प्रबल मैथुन शक्ति विकसित होती है।
*जायफल का चूर्ण लगभग आधा ग्राम शाम को पानी के साथ खाने से 6 हफ्ते में ही धातु (वीर्य) की कमी और मैथुन में कमजोरी दूर होगी।
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*जायफल का चूर्ण एक चौथाई चम्मच सुबह – शाम शहद के साथ खाऐं और इसका तेल सरसों के तेल के मिलाकर शिश्न (लिंग) पर मलें।

*बेल के पत्तों का रस 20 मिली लीटर निकालकर, उसमें सफेद जीरे का चूर्ण 5 ग्राम, मिस्री का चूर्ण 10 ग्राम के साथ खाने और दूध पीने से शरीर की कमजोरी ख़त्म होती है।
*बेल के पत्तों का रस लेकर, उसमें थोड़ा सा शहद मिलाकर शिश्नि पर 40 दिन तक लेप करने से नपुंसकता में लाभ होगा।
*सफेद मूसली और मिस्री, बराबर मिलाकर, पीसकर चूर्ण बना कर रखें और चूर्ण बनाकर 5 ग्राम सुबह – शाम दूध के साथ खाने से शरीर की शक्ति और खोई हुई मैथुन शक्ति, वापस मिल जाती है।
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Musli-Safed

*सफेद मूसली 250 ग्राम बारीक चूर्ण बना लें। उसे 2 लीटर दूध में मिलाकर खोया बना लें। फिर 250 ग्राम घी में डालकर इस खोए को भून लें। ठंडा हो जाने पर आधा किलो पीसकर शक्कर (चीनी) मिलाकर पलेट या थाली में जमा लें। सुबह – शाम 20 ग्राम खाने से काम शक्ति बढ़ती है।
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Musli-Safed-Powder

*गोखरू, कौंच के बीज, सफेद मूसली, सफेद सेमर की कोमल जड़, आंवला, गिलोय का सत और मिस्री, बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। 10 ग्राम से लगभग 20 ग्राम तक चूर्ण दूध के साथ खाने से नपुंसकता और वीर्य की कमजोरी दूर होती है।

*सिरस के थोड़े से बीज सुखाकर पीस लें। इसमें 3 ग्राम चूर्ण सुबह – शाम दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

https://indianjadibooti.com/Jadistore/Beej-Siras-Kala

नपुंसक व्यक्ति को मुनक्का खाने से वीर्य की वृद्धि होती है।
नपुंसकता में अंबर आधा से एक ग्राम सुबह – शाम मिस्री मिले दूध के साथ खाने से लाभ होता है।

*उटंगन के बीज, जो चपटे और रोमाच्छादित होते हैं, पानी में भिगोनें पर काफी लुआबदार हो जाते हैं। इनको शतावरी, कौंच बीच चूर्ण आदि के साथ सुबह शाम मिस्री मिले गर्म – गर्म दूध के साथ सेवन करने से काफी लाभ होता है।
*बहमन सफेद या बहमन सुर्ख की जड़ का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह और शाम मिस्री को मिलाकर गर्म – गर्म दूध से खाने से कामोद्दीपन होता है।
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Behman-Safed

*पिप्पली, उड़द, लाल चावल, जौ, गेहूं। सब को 100 – 100 ग्राम की मात्रा में लेकर आटा पीसकर फिर इसको देशी घी में पूरियां बनाकर, रोज़ 3 पूरियां 40 दिन तक खाऐं। ऊपर से दूध पी लें। इससे नपुंसकता दूर हो जाती है।

*आंवलों का रस निकाल कर एक चम्मच आंवले के चूर्ण में मिलाकर लें। उसमें थोड़ी सी शक्कर (चीनी) और शहद मिलाकर घी के साथ सुबह – शाम खाऐं।
*अरण्ड के बीज 5 ग्राम, पुराना गुड़ 10 ग्राम, तिल 5 ग्राम, बिनौले की गिरी 5 ग्राम, कूट 2 ग्राम, जायफल 2 ग्राम, जावित्री 2 ग्राम तथा अकरकरा 2 ग्राम। इन सबको कूट – पीसकर एक साफ कपड़े में रखकर, पोटली बना लें और इस पोटली को बकरी के दूध में उबालें। दूध जब अच्छी तरह पक जायें, तो इसे ठंड़ा करके 5 दिन तक पियें तथा पोटली से शिश्न की सिंकाई करें।
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*मुलेठी, विदारीकन्द, तज, लौग, गोखरू, गिलोय और मूसली। सब चीजे 10 – 10 ग्राम की मात्रा में लेकर पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से आधा चम्मच चूर्ण रोज 40 दिन तक सेवन करें।
*नागौरी असगंध और विधारा। दोनों 250 – 250 ग्राम की मात्रा में लेकर इसे पीसकर चूर्ण बना लें। इसमें से 2 चम्मच चूर्ण देसी घी या शहद के साथ लें।

*सालम मिस्री, तोदरी सफेद, कौंच के बीजों की मींगी, ताल मखाना, सखाली के बीज, सफेद व काली मूसली, शतावर तथा बहमन लाल। इन सबका 10 – 10 ग्राम की मात्रा में लेकर कूट पीस लें और चूर्ण बना लें। 2 चम्मच रोज़ दूध से 40 दिन तक बराबर खाने से पूरा लाभ होता है।

*नारियल कामोत्तेजक है। वीर्य को गाढ़ा करता है।
*15 चिलगोजे रोज़ खाने से नपुंसकता दूर होती है।

*अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खाऐं। स्वाद के लिए गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।

पिस्ता में विटामिन `ई´ बहुत होता है। विटामिन `ई´ से वीर्य बढ़ता है।
*सफेद कनेर की जड़ की छाल बारीक पीसकर भटकटैया के रस में खरल करके 21 दिन इन्द्री की सुपारी छोड़कर लेप करने से तेजी आ जाती है।

*किसी कपड़े को आक के दूध में चौबीस घंटे तक भिगोकर रखा रहने दें, उसके बाद निकालकर सुखा लें। फिर उस पर घी लपेट कर 2 बत्तियां बना लें और उसको लोहे की सलाई पर रखे। नीचे एक कांसे की थाली रख दे और बत्तियां जला दें, जो तेल नीचे थाली पर गिरेगा। उसे लिंग पर सुपारी छोड़ कर पूरे पर मलते रहें। आधा घंटे तक, उसके बाद एरण्ड का पत्ता लपेट कर ऊपर से कच्चा धागा बांध दें। इससे हस्तमैथुन का दोष दूर हो जाता है।

*लौंग 8 ग्राम, जायफल 12 ग्राम, अफीम शुद्ध 16 ग्राम, कस्तूरी लगभग आधा ग्राम, इनको कूट पीसकर शहद में मिलाकर आधे आधे ग्राम की गोलियां बनाकर रख लें। 1 गोली बंगला पान में रखकर खाने से स्तम्भन होता है। अगर स्तम्भन ज्यादा हो जाऐ, तो खटाई खा ले। स्खलन हो जायेगा।

*चमेली के पत्तों का रस तिल के तेल की बराबर की मात्रा में मिलाकर आग पर पकाएं। जब पानी उड़ जाए और *केवल तेल शेष रह जाए, तो इस तेल की मालिश शिश्न पर सुबह – शाम प्रतिदिन करना चाहिए। इससे नपुंसकता और शीघ्रपतन नष्ट हो जाता है।

*ढाक की जड़ का काढ़ा आधा कप की मात्रा दिन में 2 बार पीने से, बीज का तेल शिश्न पर मुण्ड छोड़कर मालिश करते रहने से कुछ ही दिनों में लाभ मिलता है।

*हींग को शहद के साथ पीसकर शिश्न या लिंग पर लेप करने से वीर्य ज्यादा देर तक रुकता है और संभोग करने में आंनद मिलता है।

*मालकांगनी के तेल को पान के पत्ते पर लगा कर रात में शिश्न (लिंग) पर लपेटकर सो जाऐं और 2 ग्राम बीजों को दूध की खीर के साथ सुबह – शाम सेवन करने से लाभ मिलता है।

*छुआरों के अन्दर की गुठली निकाल कर उनमें आक का दूध भर दे, फिर इनके ऊपर आटा लपेट कर पकायें, ऊपर का आटा जल जाने पर छुआरों को पीसकर मटर जैसी गोलियां बना लें, रात्रि के समय 1 – 2 गोली खाकर तथा दूध पीने से स्तम्भन होता है।

*आक की छाया सूखी जड़ के 20 ग्राम चूर्ण को 500 मिली लीटर दूध में उबालकर दही जमाकर घी तैयार करें, इसके सेवन से नामर्दी दूर होती है।

*शहद और दूध को मिलाकर पीने से धातु (वीर्य) की कमी दूर होती है। शरीर बलवान होता है।
*अंकुरित गेहूंओं को बिना पकायें ही खाऐं। स्वाद के लिए गुड़ या किशमिश मिलाकर खा सकते हैं। इन अंकुरित गेहूंओं में विटामिन ´ई` मिलता है। यह नपुंसकता और बांझपन में लाभकारी है।

*ब्रहमदण्डी का रस 10 से 20 मिलीलीटर सुबह शाम शहद के साथ सुबह – शाम खाने से पुरुषत्व शक्ति बढ़ती है।

*सालव मिस्री का चूर्ण 3 से 6 ग्राम सुबह – शाम खाने से नपुंसकता दूर होती है।

*हरमल के बीज का चूर्ण 2 से 4 ग्राम मिस्री को मिलाकर गर्म – गर्म दूध के साथ सुबह – शाम लेने से लाभ होता है।

*आम की मंजरी 5 ग्राम की मात्रा में सुखाकर दूध के साथ लेने से काम शक्ति बढ़ती है।
2 – 3 महीने आम का रस पीने से ताक़त आती है। शरीर की कमजोरी दूर होती है और शरीर मोटा होता है। इससे वात संस्थान (नर्वस सिस्टम) भी ठीक हो जाता है।
*रोज़ मीठे अनार के 100 ग्राम दानों को दोपहर के समय खाने से संभोग शक्ति बढ़ाती है।

उपयोगी सूचना-खटाई और बादीयुक्त समान ना खाऐं। औषधि खाने के साथ दूध और घी का प्रयोग ज्यादा करें।

Tuesday, 8 May 2018

अगर आप भी बाँझपन की समस्या से जूझ रहे हैं तो इस लेख में बताये गए उपाय आपके लिए उपयोगी साबित हो सकते है



बांझपन को दूर करेंगे यह आयुर्वेदिक उपचार:-


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परिचय - बांझपन या बंध्यापन क्या है :-
संतानोत्त्पत्ति क्षमता न होने या गर्भ न ठहर पाने की स्थिति को बन्ध्यापन (बांझपन) कहते हैं। पुरुषों के शुक्र दोष और स्त्रियों के रजोदोष के कारण ही ऐसा होता है। अत: बंध्यापन चिकित्सा में पुरुषों के वीर्य में वीर्य कीटों को स्वस्थ करने, वीर्य को शुद्ध करने की व्यवस्था करें और स्त्रियों को रजोदोष से मुक्ति करें। इससे संतान की प्राप्ति होगी।
बंध्या दोष दो प्रकार का होता है। पहला प्राकृतिक जो जन्म से ही होता है। दूसरा जो किन्ही कारणों से हो जाता है। इसमें पहले प्रकार के बांझपन की औषधि नहीं है। दूसरे प्रकार के बांझपन की औषधियां हैं। जिनके सेवन से बांझपन दूर हो जाता है।
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कारण - बांझपन के क्या कारण है :-
किसी भी प्रकार का योनि रोग, मासिक-धर्म का बंद हो जाना, प्रदर, गर्भाशय में हवा का भर जाना, गर्भाशय पर मांस का बढ़ जाना, गर्भाशय में कीड़े पड़ जाना, गर्भाशय का वायु वेग से ठंडा हो जाना, गर्भाशय का उलट जाना अथवा जल जाना आदि कारणों से स्त्रियों में गर्भ नहीं ठहरता है। इन दोषों के अतिरिक्त कुछ स्त्रियां जन्मजात वन्ध्या (बांझ) भी होती है। जिन स्त्रियों के बच्चे होकर मर जाते हैं। उन्हें “मृतवत्सा वन्ध्या“ तथा जिनके केवल एक ही संतान होकर फिर नहीं होती है तो उन्हें `काक वन्ध्या` कहते हैं।
लक्षण : बांझपन के लक्षण

(गुणों की खान हैं अश्वगंधा, सफेद मूसली, शतावरी, गोखरू, कौंच के बीज आदि:-


बांझपन का लक्षण गर्भ का धारण नहीं करना होता है।
उपचार : विभिन्न औषधियों से उपचार
1.मैनफल: मैनफल बीजों का चूर्ण 6 ग्राम केशर के साथ शक्कर मिले दूध के साथ सेवन करने से बन्ध्यापन अवश्य दूर होता है। साथ ही मैनफल के बीजों का चूर्ण 8 से 10 रत्ती गुड़ में मिलाकर बत्ती बनाकर योनि में धारण करना चाहिए। दोनों प्रकार की औषधियों के प्रयोग से गर्भाशय की सूजन, मासिक-धर्म का कष्ट के साथ आना, अनियमित स्राव आदि विकार नष्ट हो जाते हैं।
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जिस स्त्री के गर्भाधान ही नहीं होता, वह चुटकी भर दालचीनी पावडर एक चम्मच शहद में मिलाकर अपने मसूढ़ों में दिन में कई बार लगायें। थूंके नहीं। इससे यह लार में मिलकर शरीर में चला जाएगा। एक दम्पत्ति को 14 वर्ष से संतान नहीं हुई थी, महिला ने इस विधि से मसूढ़ों पर दालचीनी, शहद लगाया, वह कुछ ही महीनों में गर्भवती हो गई और उसने पूर्ण विकसित दो सुन्दर जुड़वा बच्चों का जन्म दिया।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Guggalhttps://indianjadibooti.com/Jadistore/Rasaut4. तेजपात:गर्भाशय की शिथिलता (ढीलापन) के चलते यदि गर्भाधान न हो रहा तो तेजपात (तेजपत्ता का चूर्ण) 1 से 4 ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय की शिथिलता दूर हो जाती है तथा स्त्री गर्भधारण के योग्य बन जाती है।
कभी-कभी किसी स्त्री को गर्भाधान ही नहीं होता है बांझपन की समस्या का सामना करना पड़ता है। किसी को गर्भ रुकने के बाद गर्भस्राव हो जाता है। तेजपात दोनों ही समस्याओं को खत्म करता है। तेजपात का पाउडर चौथाई चम्मच की मात्रा में तीन बार पानी से नियमित लेना चाहिए। कुछ महीने तेजपात की फंकी लेने से गर्भाशय की शिथिलता दूर होकर गर्भाधान हो जाता है जिन स्त्रियों को गर्भस्राव होता है, उन्हें गर्भवती होने के बाद कुछ महीने तेजपत्ते के पाउडर की फंकी लेनी चाहिए। इस तरह तेजपत्ते से गर्भ सम्बन्धी दोष नष्ट हो जाते हैं और स्त्री गर्भधारण के योग्य हो जाती है।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Tej-Patta5. तुलसी: यदि किसी स्त्री को मासिक-धर्म नियमित रूप से सही मात्रा में होता होता हो, परन्तु गर्भ नहीं ठहरता हो तो उन स्त्रियों को मासिक-धर्म के दिनों में तुलसी के बीज चबाने से या पानी में पीसकर लेने अथवा काढ़ा बनाकर सेवन करने से गर्भधारण हो जाता है। यदि गर्भ स्थापित न हो तो इस प्रयोग को 1 वर्ष तक लगातार करें। इस प्रयोग से गर्भाशय निरोग, सबल बनकर गर्भधारण के योग्य बनता है।
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6. नागकेसर: नागकेसर (पीला नागकेशर) का चूर्ण 1 ग्राम गाय (बछड़े वाली) के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करें, और यदि अन्य कोई प्रदर रोगों सम्बन्धी रोगों की शिकायत नहीं है तो निश्चित रूप से गर्भस्थापन होगा। गर्भाधान होने तक इसका नियमित रूप से सेवन करना चाहिए। इसमें गर्भधारण में अवश्य ही सफलता मिलती है।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Nagkesar7. कंटकारी: कंटकारी, भटकटैया और रेंगनीकाट आदि नामों से इसे जाना जाता है। इसके फल आधे से एक इंच व्यास के चिकने, गोल और पीले तथा कभी-कभी सफेद रंग के होते हैं। ये सभी हरे रंग के और धारी युक्त होते हैं। फूलों की दृष्टि से ये दो प्रकार के होते हैं। एक गहरे नीले रंग की तथा दूसरा सफेद रंग की। सफेद रंग वाली को श्वेत कंटकारी कहते हैं। श्वेत कंटकारी की ताजी जड़ को दूध में पीसकर मासिकस्राव के चौथे दिन से प्रतिदिन दो ग्राम पिलाने से गर्भधारण होता है।
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8. गोखरू:छोटा गोखरू और तिल को समान मात्रा में लेकर, चूर्ण बनाकर रख लें। इसे 4 से 8 ग्राम सुबह-शाम बकरी के दूध में सेवन करने से गर्भाशय शुद्ध होकर बंधत्व (बांझपन) नष्ट हो जाता है। यहां यह ध्यान रखना चाहिए कि गोखरू दो प्रकार का होता है। एक छोटा और दूसरा बड़ा। यहां छोटे गोखरू के बारे में लिखा गया है। बड़े वाले गोखरू में यह क्षमता नहीं होती है।
लगभग 10-20 ग्राम गोखरू के फल के चूर्ण की फंकी देने से स्त्रियों में बांझपन (Banjhpan)का रोग मिट जाता है।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Gokhru-Chota9. अमरबेल: अमरबेल या आकाशबेल (जो बेर के समान वृक्षों पर पीले धागे के समान फैले होते हैं) को छाया में सुखाकर रख लें। इसे चूर्ण बनाकर मासिक-धर्म के चौथे दिन से पवित्र होकर प्रतिदिन स्नान के बाद 3 ग्राम चूर्ण 3 ग्राम जल के साथ सेवन करना चाहिए। इसे नियमित रूप से नौ दिनों तक सेवन करना चाहिए। सम्भवत: प्रथम आवृत्ति में ही गर्भाधान हो जाएगा। यदि ऐसा न हो सके तो योग पर अविश्वास न कर अगले आवृत्ति में भी प्रयोग करें, इसे घाछखेल के नाम से भी जाना जाता है। इसकी कच्चे धागे के क्वाथ (काढ़ा) से गर्भपात होता है।
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Afteeyun,Aftiun10. विष्णुकान्ता: पति-पत्नी दोनों को विष्णुकान्ता (नीलशंखपुष्पी) के पत्तों का रस लगभग 20 से 40 ग्राम की मात्रा में या 40 से 80 ग्राम की मात्रा में सेवन करना चाहिए। इससे पति की पूयमेह, शुक्रमेह, मूत्रकृच्छ और धातु की दुर्बलता दूर होती है। पत्नी की गर्भाशय के दुर्बलता के कारण गर्भाधान न होने की शिकायत भी दूर हो जाएगी।
11. गम्भारीफल: यदि किसी स्त्री का गर्भाशय छोटा होने के कारण या सूख जाने की वजह से बंध्यापन (बांझपन) हो तो गम्भारीफल की मज्जा और मुलहठी (मुलेठी) को 250 ग्राम की मात्रा में गर्म दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से गर्भाशय पूर्ण रूप से पुष्ट हो जाता है और बांझपन दूर हो जाता है।
12. बिजौरा नींबू: बिजौरा नींबू के बीजों को दूध में पकाकर, एक चम्मच घी मिलाकर मासिकस्राव के चौथे दिन से प्रतिदिन सुबह-शाम पीने से गर्भ की स्थापना निश्चित रूप से होती है। पन्द्रह दिनों तक क्रम नियमित रूप से जारी रखना चाहिए। यदि पहले महीने में गर्भधारण न हो तो अगले मासिकस्राव के चौथे दिन से इसे पुन: जारी करना चाहिए। यह प्रयोग व्यर्थ नहीं जाता है। इससे गर्भधारण अवश्य ही होता है।
13. हींग: यदि गर्भाशय में वायु (गैस) भर गई हो तो थोड़ी-सी कालीहींग को कालीतिलों के तेल में पीसकर तथा उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिन तक योनि में रखे। इससे बांझपन (Banjhpan)का दोष नष्ट हो जाएगा। प्रतिदिन दवा को ताजा ही पीसना चाहिए।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Hing14. हरड़: यदि गर्भाशय में कीडे़ पड़ गये हों तो हरड़, बहेड़ा, और कायफल, तीनों को साबुन के पानी के साथ सिल पर महीन पीस लें, फिर उसमें रूई का फोहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखना चाहिए। इस प्रयोग से गर्भाशय के कीड़े नष्ट हो जाते हैं।
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15. कस्तूरी: यदि गर्भाशय उलट गया हो तो कस्तूरी और केसर को समान मात्रा में लेकर पानी के साथ पीसकर गोली बना लें। इस गोली को ऋतु (माहवारी होने के पहले) भग (योनि) में रखें। इसी प्रकार तीन दिनों तक गोली रखने से गर्भाशय ठीक हो जाता है।
16. पीपल:
पीपल वृक्ष की जटा का चूर्ण 5 ग्राम मासिकस्राव (मासिक-धर्म) के चौथे, पांचवे, छठे और सातवे दिन सुबह स्नानकर बछड़े वाली गाय के दूध के साथ सेवन किया जाए तो बन्ध्यापन मिटकर गर्भवती होने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
पीपल की डोडी कच्ची 250 ग्राम, शक्कर 250 ग्राम की मात्रा में लेकर चूर्ण तैयार कर लें। मासिक-धर्म के बाद 10 ग्राम चूर्ण मिश्री और दूध के साथ सुबह-शाम देना चाहिए। इसे 10 दिनों तक लगातार सेवन करने से लाभ मिलता है।
पीपल के सूखे फलों का चूर्ण कच्चे दूध के साथ आधा चम्मच की मात्रा में, मासिक-धर्म शुरू होने के 5 दिन से 2 हफ्ते तक सुबह-शाम रोजाना सेवन करने से बांझपन दूर होगा। यदि लाभ न हो तो आप अगले महीने भी यह प्रयोग जारी कर सकते हैं।
लगभग 250 ग्राम पीपल के पेड़ की सूखी पिसी हुई जड़ों में 250 ग्राम बूरा मिलाकर पति व पत्त्नी दोनों, जिस दिन से पत्त्नी का मासिकधर्म आरम्भ हो, 4-4 चम्मच गर्म दूध में रोजाना 11 दिन तक फंकी लें। जिस दिन यह मिश्रण समाप्त हो, उसी रात से 12 बजे के बाद रोजाना संभोग (स्त्री प्रंसग) करने से बांझपन की स्थिति में भी गर्भधारण की संम्भावना बढ़ जाती है।
पीपल के सूखे फलों के 1-2 ग्राम चूर्ण की फंकी कच्चे दूध के साथ मासिक-धर्म के शुद्ध होने बाद 14 दिन तक देने से औरत का बांझपन मिट जाता है।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/pipal-choti17. समुन्दरफल: समुन्दरफल, कालानमक और थोड़ा सा लहसुन पीसकर, रूई के फाहे में लपेटकर योनि में रखने से जला हुआ गर्भाशय ठीक हो जाता है। यदि इससे जलन होने लगे तो फाहे को निकालकर फेंक देना चाहिए तथा दिन में एक बार इसे पुन: रखना चाहिए। इसे ऋतुकाल (माहवारी) के पहले दिन से लेकर तीसरे दिन तक योनि में रखना चाहिए।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/samunder-fan18. जीरा: काला जीरा, हाथी का नख तथा एरण्ड (अरण्डी) का तेल को महीन करके पीस लें। फिर उसमें रूई का फोहा तर करके तीन दिन तक योनि में रखें। इससे गर्भाशय का बढ़ा हुआ मांस ठीक हो जाता है।
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https://indianjadibooti.com/Jadi…/Arandi-Seeds,-Castor-Seeds19. ढाक: ढाक (छिउल) के बीजों की भस्म राख बना लें, इसे माहवारी खत्म होने के बाद स्त्री को 3 ग्राम की मात्रा में मिश्री मिले दूध के साथ खिलाना चाहिए। इससे बांझपन (Banjhpan)दूर हो जाता है।
ढाक के बीज के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-
https://indianjadibooti.com/Jadisto…/Bilas-Papda--Palas-Beej20. शिवलिंगी: शिवलिंगी के बीज नौ दाने, सूर्योदय के समय सूर्यदर्शन करके स्नान करके पति के हाथ से लेकर दूध के साथ खाएं। माहवारी खत्म होने के बाद सूर्य का व्रत भी करें। इसी दिन व्रत में ही धूप दीप से सूर्य की पूजा करें। कुछ भोजन न करें। केवल दूध का ही सेवन करें। रात्रि में संभोग करें। इससे अवश्य ही गर्भधारण हो जाएगा। इसे एक सप्ताह तक अवश्य प्रयोग करें।
शिवलिंगी के बीज के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-
https://indianjadibooti.com/Jadi…/Shivlangi--Shivlingi-SeedsIndian jadi booti's Putrajivak Seeds (Jiyapota)
21. नौसादर: 20-20 ग्राम की मात्रा में नौसादर और बीजा बेल को पीसकर चार गोली 10-10 ग्राम की बनाकर रख लें। एक गोली रजस्वला के साथ खाएं। दूध का सेवन करे। गर्भ शुद्ध होने पर संभोग करना चाहिए। यदि पांचवें, सातवें, नौवे, ग्यारहवें, तेरहवें दिन संभोग करें तो पुत्र की प्राप्ति होगी।
नौसादर और बीजबोल के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Nausader-Katlihttps://indianjadibooti.com/Jadi…/Bijabol--Hirabol--Murmukhi22. बच: यदि गर्भाशय शीतल (ठंडा) हो गया तो बच, काला जीरा , और असगंध इन तीनों को सुहागे के पानी में पीसकर उसमें रूई का फाहा भिगोकर तीन दिनों तक योनि में रखने से उसकी शीतलता दूर हो जाती है। इस प्रयोग के चौथे दिन मैथुन करने से गर्भ ठहर जाता है।
23. कायफल: कायफल को कूट-छानकर चूर्ण बना लें, फिर उसमें बराबर मात्रा में शक्कर मिलाकर रख लें। ऋतु स्नान के तीन दिनों तक इस चूर्ण को एक मुट्ठी भर सेवन करते हैं। पथ्य में केवल दूध और चावल का सेवन करना चाहिए। इसके चौथे दिन संसार- व्यवहार (स्त्री-प्रसंग) करने से गर्भ ठहर जाता है।
कायफल चूर्ण के लिए इस लिंक पर क्लिक करें :-
https://indianjadibooti.com/Jadistore/Kaiphal-Powder24. असगंध:
असंगध, नागकेसर और गोरोचन इन तीनों को समान मात्रा में बराबर मात्रा में लेकर पीस-छान लें। इसे शीतल जल के साथ सेवन करें तो गर्भ ठहर जाता है।
असगंध का चूर्ण 50 ग्राम की मात्रा में लेकर कूटकर कपड़छन कर लें। जब रजस्वला स्त्री स्नान करके शुद्ध हो जाए तो 10 ग्राम इसका सेवन घी के साथ करें। उसके बाद पुरुष के साथ रमण (मैथुन) करें तो इससे बांझपन दूर होकर महिला गर्भवती हो जाएगी।
25. खिरेंटी: खिरेंटी, खांड, कंघी, मुलेठी, बरगद के अंकुर, तथा नागकेसर को शहद, दूध तथा घी में पीसकर सेवन कराने से बांझ स्त्री भी गर्भधारण करने के योग्य हो जाती है।
26. छोटी पीपल: छोटी पीपल, सोंठ, कालीमिर्च तथा नागकेसर तीनों को समान मात्रा में पीसकर रख लें। इस चूर्ण को 6 ग्राम की मात्रा में गाय के घी में मिलाकर मासिक-स्राव के चौथे दिन स्त्री को सेवन करायें तथा रात को सहवास करें तो उसे पुत्र की प्राप्ति होती है।
27. बरियारी: बरियारी, गंगेरन, मुलहठी, काकड़ासिंगी, नागकेसर मिश्री इन सभी को बराबर मात्रा में लेकर पीस-छानकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को लगभग 10 ग्राम लेकर घी, दूध तथा शहद में मिलाकर पीने से बांझ स्त्री को भी मातृत्व सुख मिलता है।
28. अतिबला: अतिबला के साथ नागकेसर को पीसकर ऋतुस्नान के बाद, दूध के साथ सेवन करने से लम्बी आयु वाला (दीर्घजीवी) पुत्र उत्पन्न होता है।
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https://indianjadibooti.com/Jadisto…/KanghiAtibala--Mahabala29. बबूल (कीकर): कीकर (बबूल) के वृक्ष में चार-पांच गज की दूरी पर एक फोड़ा सा निकलता है। जिसे कीकर का बान्दा कहा जाता है। इसे लेकर कूटकर छाया में सुखाकर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को तीन ग्राम की मात्रा में माहवारी के समाप्ति के अगले दिन से तीन दिनों तक सेवन करें। फिर पति के साथ संभोग करे इससे गर्भ अवश्य ही धारण होगा।
30. आक: सफेद आक की छाया में सूखी जड़ को महीन पीसकर, एक-दो ग्राम की मात्रा में 250 मिलीलीटर गाय के दूध के साथ सेवन स्त्री को करायें। शीतल पदार्थो का पथ्य देवें। इससे बंद ट्यूब व नाड़ियां खुलती हैं, व मासिक-धर्म व गर्भाशय की गांठों में भी लाभ होता है।
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31. लहसुन: सुबह के समय 5 कली लहसुन की चबाकर ऊपर से दूध पीयें। यह प्रयोग पूरी सर्दी के मौसम में रोज करने से स्त्रियों का बांझपन दूर हो जाता है।
32. फिटकरी: मासिक-धर्म ठीक होने पर भी यदि संतान न होती हो तो रूई के फाये में फिटकरी लपेटकर पानी में भिगोकर रात को सोते समय योनि में रखें। सुबह निकालने पर रूई में दूध की खुर्चन सी जमा होगी। फोया तब तक रखें, जब तक खुर्चन आता रहे। जब खुर्चन आना बंद हो जाए तो समझना चाहिए कि बांझपन रोग समाप्त हो गया है।
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https://indianjadibooti.com/Jadistore/Phitkari-Safed33. गाजर: बांझ स्त्री (जिस औरत के बच्चा नहीं होता) को गाजर के बीजों की धूनी इस प्रकार दें कि उसका धुंआं रोगिणी की बच्चेदानी तक चला जाए। इसके लिए जलते हुए कोयले पर गाजर के बीज डालें। इससे धुंआ होगा। इसी धूनी को रोगिणी को दें तथा रोजाना उसे गाजर का रस पिलायें। इससे बांझपन दूर हो जाएगा।
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34. अजवायन: मासिकधर्मोंपरान्त आठवे दिन से नित्य अजवाइन और मिश्री 25-25 ग्राम लेकर 125 मिलीलीटर पानी में रात्रि के समय एक मिट्टी के बर्तन में भिगों दे तथा प्रात:काल के समय ठंडाई की भांति घोट-पीसकर सेवन करें। भोजन में मूंग की दाल और रोटी बिना नमक की लें। इस प्रयोग से गर्भ धारण होगा।
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यह जानकारी लाखों लोगों के अनुभवों से एकत्र की गयी है, कृपया संतानोत्पत्ति के लिए एक समय पर एक ही उपाय का प्रयोग करें और किसी अच्छे आयुर्वेदिक चिकित्सक की देख रेख अथवा निगरानी में प्रयोग करें, किसी भी औषधि का अनुचित प्रकार से और अधिक मात्रा में सेवन स्वास्थय के लिए हानिकारक भी हो सकता है  


(गुणों की खान हैं अश्वगंधा, सफेद मूसली, शतावरी, गोखरू, कौंच के बीज आदि:-